कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था नाबालिग से दुष्कर्म का केस, सात साल बाद चार्जशीट दायर

Updated at : 02 Jul 2024 11:26 PM (IST)
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कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था नाबालिग से दुष्कर्म का केस, सात साल बाद चार्जशीट दायर

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ था नाबालिग से दुष्कर्म का केस, सात साल बाद चार्जशीट दायर

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नाथनगर के मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की को अगवा कर दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने सात साल बाद चार्जशीट दायर किया है. बता दें कि पूर्व में गिरफ्तार दो अभियुक्त जितेंद्र और सुनीता के विरुद्ध चार्जशीट दायर किया जा चुका था. जबकि, कांड का मुख्य अभियुक्त बांका जिला के नवादा गोराडीह निवासी रंजीत यादव फरार था. उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के बाद पुलिस ने मामले में रंजीत यादव के विरुद्ध चार्जशीट दायर कर दिया है. उल्लेखनीय है कि विगत फरवरी 2017 में घटित इस घटना को लेकर पीड़िता के पिता ने पहले मधुसूदनपुर थाना में इस बात की शिकायत की थी. उस वक्त थाना में मौजूद पदाधिकारी ने प्रेम-प्रसंग का मामला बता कोर्ट में केस करने की बात कही थी. जिसके बाद पीड़िता के पिता ने भागलपुर सीजेएम कोर्ट में नालिसीवाद दायर कराया था. जिसपर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मामले में मधुसूदनपुर पुलिस को मामले में केस दर्ज करने के लिए आदेशित किया था. उक्त मामले में उस वक्त बेटी को अगवा करने और घर से गहनों की चोरी करने का आरोप लगाया गया था. पुलिस द्वारा मामले में की गयी जांच में पीड़िता के नाबालिग होने की बात का खुलासा हुआ था. इसके बाद मामले में पॉक्सो की धारा भी जोड़ी गयी थी. पीड़िता की मेडिकल जांच और 164 के बयान में दुष्कर्म किये जाने का भी खुलासा हुआ था. मारपीट मामले में दोषी अभियुक्त परवीक्षा अधिनियम पर रिहा शाहकुंड थाना में 10 साल पूर्व दर्ज मारपीट के मामले में एडीजे 16 में चल रही सुनवाई के दौरान तीन अभियुक्तों को दोषसिद्ध करार दिया गया था. मामले में एडीजे 16 की अदालत ने तीनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए परवीक्षा अधिनियम की धारा 3 के तहत चेतावनी देकर रिहा कर दिया. जिन अभियुक्तों को रिहा किया गया है उनमें संजय पाल सहित अन्य दो अभियुक्त शामिल हैं. बता दें कि परवीक्षा अधिनियम की धारा 3 अदालतों को औपचारिक सजा देने के बजाय चेतावनी या चेतावनी के साथ अपराधियों को रिहा करने की अनुमति देती है. यह प्रावधान विशिष्ट अपराधों, जैसे चोरी, धोखाधड़ी, या अन्य अपराधों के लिए दोषी पाए गए व्यक्तियों पर लागू होता है, जिसमें दो साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है.

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