बाइपास रोड वसूली कांड: चार पुलिसकर्मी निलंबित, लेकिन कई सवाल अब भी बाकी
बाइपास रोड पर ट्रक चालकों से अवैध वसूली के मामले में रविवार को बाइपास थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद भी कई सवाल अब भी बाकी है
अवैध वसूली के नेटवर्क और जिम्मेदारों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
भागलपुर से अतुल तिवारी की रिपोर्ट
बाइपास रोड पर ट्रक चालकों से अवैध वसूली के मामले में रविवार को बाइपास थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद भी कई सवाल अब भी बाकी है. इसे लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खेल कोई एक-दो दिन का नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहा था. ऐसे में सिर्फ निलंबन की कार्रवाई से मामला खत्म नहीं माना जा सकता.
स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ साल पहले चाय दुकान पर ट्रक चालकों से संपर्क किया जाता था, लेकिन बाद में थाने के पीछे बैरियर लगाकर सड़क पर ही वसूली का कथित सिस्टम विकसित कर लिया गया. आरोप है कि ट्रकों से प्रति वाहन 200 रुपये लिए जाते थे. इतना ही नहीं, थाने में खाना बनाने वाला एक रसोइया भी कथित रूप से इस काम में लगाया गया था, जो दिन और रात में वर्दीनुमा कपड़े पहनकर सड़क पर ड्यूटी करता दिखाई देता था.लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि थाने के पीछे लंबे समय से वसूली हो रही थी तो क्या इसकी जानकारी तत्कालीन और वर्तमान थानाध्यक्ष को नहीं थी. थाने के बगल में चल रहे इस कथित खेल की भनक आखिर पुलिस अधिकारियों को इतने दिनों तक क्यों नहीं लगी.
क्या जांच की आंच पूर्व अधिकारियों तक पहुंचेगी
स्थानीय लोगों ने की मांग है कि सिर्फ निलंबन पर्याप्त नहीं है. यदि अवैध वसूली के आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित लोगों पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए और कथित अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए. इस बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या जांच की आंच पूर्व में बाइपास थाना में पदस्थापित अधिकारियों तक भी पहुंचेगी. लोगों का कहना है कि यदि यह वसूली लंबे समय से चल रही थी तो इसकी जिम्मेदारी केवल वर्तमान कर्मियों तक सीमित नहीं हो सकती.वाहनों को नो एंट्री से पास कराने का आरोप
गौरतलब है कि जगदीशपुर रोड पर जाम की समस्या को देखते हुए वर्षों पहले जिला प्रशासन ने बड़े वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट निर्धारित किया था. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में ट्रकों को नो-एंट्री क्षेत्र से गुजरने दिया जा रहा था, जिससे जाम और सड़क दुर्घटनाओं की समस्या लगातार बढ़ रही थी. अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि यह कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रहती है या फिर पूरे नेटवर्क तक जांच पहुंचती है.सड़क हादसे के बाद लोगों ने जलाया था 10 ट्रक
मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2019 में हुये सड़क हादसे में कई लोगों की मौत हो गयी. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया. इस दौरान आक्रोशितों ने करीब 10 ट्रक को आग के हवाले कर दिया. इस घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से मौखिक आदेश जारी कर वन-वे परिचालन का निर्देश दिया गया था. आदेश था कि बांका की ओर से विक्रमशिला पुल की ओर जाने वाले भारी वाहन जगदीशपुर होते हुये निकलेगा. वहीं विक्रमशिला पुल की ओर से जगदीशपुर व झारखंड जाने वाले वाहन जीच्छो-गाेराडीह से लोदीपुर होते हुये गुजरना था. वहीं कुछ लोगों ने बताया कि वर्ष 2015-16 के आसपास भी जाम की समस्या को देखते हुये यह नियम लागू किया गया था.वन-वे परिचालन के आदेश पर वसूली का आरोप
वर्ष 2025 में फुलवरिया के पास हुये सड़क हादसे के बाद लोगों ने दोनों ओर से वाहनों के परिचालन पर नाराजगी जताते हुये प्रदर्शन किया था. इस दौरान एक अधिकारी ने कहा था कि वन-वे परिचालन का आरोप मौखिक था, जो खत्म हो चुका है. इसके बाद लोगों ने आरोप लगाया था कि वन-वे परिचालन के नाम पर ही ट्रकों से वसूल की जाती है.
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