भवनहीन विद्यालयों को भी हर वर्ष शिक्षा विभाग से मिल रही रखरखाव की राशि

शिक्षा विभाग से प्रतिवर्ष ऐसे विद्यालयों को भी विद्यालय के रखरखाव के लिए राशि दी जा रही है, जिन विद्यालयों को अपना भवन नहीं है.
गोपालपुर. शिक्षा विभाग से प्रतिवर्ष ऐसे विद्यालयों को भी विद्यालय के रखरखाव के लिए राशि दी जा रही है, जिन विद्यालयों को अपना भवन नहीं है. ऐसे भवनहीन विद्यालय विभागीय निर्देश पर दूसरे विद्यालयों के एक कमरे में चलाया जा रहा हैं. गोपालपुर प्रखंड में ऐसे तीन विद्यालय हैं. रंगरा प्रखंड में पांच विद्यालय व इस्माइलपुर प्रखंड में तीन विद्यालय हैं. गंगा कटाव से विस्थापित मवि बुद्धचक 10-12 वर्षों से प्राथमिक विद्यालय बीरनगर के दो तीन कमरों में चलाये जा रहे हैं. रखरखाव की राशि दोनों विद्यालयों को दी जा रही है. इसी तरह गंगा के कटाव से विस्थापित होकर प्राथमिक विद्यालय बिंद टोली को राजकीय बुनियादी उवि के एक कमरे में पिछले पांच-छह वर्षों से संचालित किया जा रहा है. रखरखाव की राशि प्राथमिक विद्यालय बिंद टोली को भी प्रतिवर्ष आवंटित की जा रही है. नवसृजित प्राथमिक विद्यालय सैदपुर दुर्गा स्थान से पहले सामुदायिक भवन में चलाया जाता था. पिछले तीन-चार वर्षों से प्राथमिक विद्यालय सैदपुर उत्तर में चलाया जा रहा है, जबकि रखरखाव की राशि दोनों विद्यालयों को प्रतिवर्ष दी जा रही है. इस्माईलपुर प्रखंड में तीन व रंगरा चौक प्रखंड में पांच इस तरह के विद्यालय दूसरे विद्यालय में संचालित किये जा रहे हैं. ऐसे सभी विद्यालयों को प्रतिवर्ष रखरखाव के लिए शिक्षा विभाग से राशि दी जा रही है. ऐसे में इन विद्यालयों को दी गयी रखरखाव की राशि का बंदरबांट विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से करने से इंकार नहीं किया जा सकता है. इन विद्यालयों के निरीक्षण करने की जिम्मेदारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों की होती है, लेकिन गोपालपुर व इस्माइलपुर प्रखंड में लंबे समय से प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के नहीं रहने से डीपीओ नीतीश कुमार प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी दोनों प्रखंडों के हैं. इनके दर्शन शायद ही प्रखंडों के बीआरसी में हो पाते हैं. फलस्वरूप बीआरसी के डाटा ऑपरेटर व लेखापाल ही सर्वेसर्वा विद्यालयों के हैं. रंगरा प्रखंड की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कुमारी निर्मला एक वर्ष से अधिक समय से बीमारी से ग्रसित हैं. जिससे निरीक्षण वह नहीं कर पाती हैं. गोपालपुर व इस्माइलपुर के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नीतीश कुमार कहते हैं कि जिले में विभागीय कार्य के कारण प्रखंडों में समुचित समय देने में लाचार हूं.
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