बिहार की बेटी अर्चना बनी मिसाल, छत से गिर कर आधा शरीर गंवाने के बाद भी 14 नेशनल मेडल के साथ सरकारी सेवा की हासिल

तीन भाइयों की इकलौती बहना हैं अर्चना. इस वजह से पूरे परिवार की लाड़ली हैं. किसान परिवार में जन्म और पालन-पोषण हुआ. कम पैसे, पर सुकून वाली जिंदगी थी सभी की. सब कुछ एक सामान्य परिवार की तरह चल रहा था. लेकिन अचानक इस शांत परिवार में तुफान आ गया.
संजीव,भागलपुर: तीन भाइयों की इकलौती बहना हैं अर्चना. इस वजह से पूरे परिवार की लाड़ली हैं. किसान परिवार में जन्म और पालन-पोषण हुआ. कम पैसे, पर सुकून वाली जिंदगी थी सभी की. सब कुछ एक सामान्य परिवार की तरह चल रहा था. लेकिन अचानक इस शांत परिवार में तुफान आ गया.
दरअसल एक दिन अर्चना अचानक अपने घर की छत से जमीन पर गिर गयीं. उस समय वह नौवीं कक्षा की छात्रा थीं. छत से गिरने के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गयी और छाती के नीचे का शरीर उनके अधिकार में नहीं रहा. 14 साल पहले हुई इस घटना ने न केवल उनके जीवन में तुफान मचा दिया, बल्कि घर में भाई-बहनों के गूंजनेवाली खिलखिलाहट व ठहाकों पर भी ब्रेक लगा दिया. अपने स्कूल की बेहतरीन खिलाड़ी रही अर्चना को इससे तेज झटका लगा. दौड़ती-कूदती अर्चना को व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा. पर पूरे परिवार के साथ अर्चना ने नियति के आगे घुटने नहीं टेके.
सबने मिल कर प्रण किया कि जांबाज वो जो काल का पंजा मोड़ सके. इस प्रण के साथ शुरू हुआ एक बार फिर से शॉटपुट, डिस्कस थ्रो और जेवलिन थ्रो का प्रैक्टिस. भाइयों के साथ, स्कूल के कोच के साथ व्हील चेयर पर बैठ कर ही रोजाना तीन घंटे की प्रैक्टिस फिर से शुरू हुई. वो भाला फेंकती और भाइयों की टोली ताली बजाती. परिणाम सुखद रहा. आज अर्चना के पास पांच गोल्ड, छह सिल्वर और तीन ब्राॅन्ज मेडल हैं. ये सभी नेशनल लेवल के मेडल हैं. 2017 में चाइना के बीजिंग और 2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भागीदारी की. बिहार सरकार ने भी उनकी प्रतिभा का सम्मान किया और बिहार सरकार में उनकी सेवा ली गयी. 24 जनवरी 2020 से वह भागलपुर के जिला अभिलेखागार में बतौर लिपिक कार्यरत हैं.
नाम : अर्चना कुमारी
शिक्षा : बीए
पिता : महेश मंडल (किसान)
माता : फूलमती देवी
ग्राम : नगरी
थाना : पंजवारा
जिला : बांका
वर्तमान पता : मारवाड़ी पाठशाला, पुलिस कॉलोनी, सरकारी क्वार्टर
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2006 में छत से गिरने से चोटिल. स्पाइनल इंज्युरी हुई. चोट लगने से चेस्ट के नीचे शरीर पूरी तरह बेजान है. 14 साल से व्हील चेयर ही सहारा.
2009 में पटना में स्टेट लेवल खेली
2009 जयपुर के मानसिंह स्टेडियम में गोल्ड मिला था
2010 में हरियाणा पंचकूला देवी लाल स्टेडियम में दो सिल्वर, एक ब्राॅन्ज जीती
2012 में बेंगलुरु में एक गोल्ड, एक ब्राॅन्ज जीती
2013 में बेंगलुरु में गोल्ड जीती
2015 में गाजियाबाद में एक गोल्ड, एक ब्राॅन्ज
2016 में हरियाणा में एक गोल्ड, दो सिल्वर
2017 में जयपुर सवाई मानसिंह स्टेडियम में दो सिल्वर
2017 में चाइना के बीजिंग में शॉटपुट में भाग ली
2018 में इंडोनेशिया के जकार्ता में एशियन गेम्स में भाग ली
Posted by: Thakur Shaktilochan
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