2 KM का मरीन ड्राइव बदलेगा भागलपुर-मुंगेर की तस्वीर, 44 गांवों से गुजरेगा ₹5,119 करोड़ का फोरलेन
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भागलपुर और मुंगेर को जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी फोरलेन मरीन ड्राइव परियोजना पर ₹5,119 करोड़ खर्च होंगे. यह परियोजना 44 गांवों से होकर गुजरेगी और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी. जानें इसके फायदे और पेड़ों पर असर.
Bhagalpur News: भागलपुर और मुंगेर के बीच कनेक्टिविटी को बदलने वाली एक बड़ी सड़क परियोजना अब अगले महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गयी है. सुलतानगंज से मुंगेर तक करीब 42 किलोमीटर लंबा फोरलेन मरीन ड्राइव 44 गांवों से होकर गुजरेगा. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 5,119 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है.
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDC) ने भारत सरकार के वन मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन किया है. परियोजना की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रस्तावित गंगापथ के रास्ते में आने वाले 726 पेड़ों को हटाना पड़ेगा. इनमें 517 पेड़ों को काटा जाएगा, जबकि 209 पेड़ों को उखाड़कर दूसरी जगह लगाया जाएगा.
यह परियोजना सिर्फ एक नया सड़क मार्ग नहीं होगी. इसके पूरा होने के बाद मुंगेर शहर को बाइपास मिलेगा, श्रीकृष्ण सेतु से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और गंगा किनारे स्थित कई धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है.
42 किलोमीटर का फोरलेन मरीन ड्राइव, खर्च होंगे ₹5,119 करोड़
सुलतानगंज से मुंगेर के सफियाबाद, बरियारपुर और घोरघट होते हुए प्रस्तावित गंगा पथ करीब 42 किलोमीटर लंबा होगा. यह फोरलेन सड़क परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर आधारित है.
बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी गयी है. परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले पर्यावरण और वन से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है.
बीएसआरडीसीएल की तकनीकी टीम के साथ मुंगेर और भागलपुर वन विभाग के क्षेत्र पदाधिकारियों ने परियोजना क्षेत्र की स्थलीय जांच पूरी कर ली है. इसके बाद वृक्ष संरक्षण योजना भी तैयार की गयी है.
726 पेड़ों पर पड़ेगा परियोजना का असर
मरीन ड्राइव के निर्माण के रास्ते में कुल 726 पेड़ प्रभावित होने की बात रिपोर्ट में सामने आयी है. इनमें 517 पेड़ों को काटकर हटाया जाएगा, जबकि 209 पेड़ों का ट्रांसलोकेशन किया जाएगा.
यानी ऐसे पेड़ों को, जिन्हें तकनीकी रूप से सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है, उन्हें काटने के बजाय दूसरी जगह लगाने की योजना है.
अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वन मंत्रालय से पर्यावरण मंजूरी महत्वपूर्ण होगी. मंजूरी मिलने के बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों को गति मिलने की उम्मीद है.
श्रीकृष्ण सेतु से इंटरचेंज के जरिए जुड़ेगा मरीन ड्राइव
इस परियोजना का एक बड़ा फायदा मुंगेर और उत्तरी बिहार की कनेक्टिविटी को माना जा रहा है. प्रस्तावित गंगापथ को श्रीकृष्ण सेतु से इंटरचेंज के जरिए जोड़ा जाएगा.
इससे उत्तरी बिहार की ओर आने-जाने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्ग मिलेगा. मुंगेर शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करने में भी यह सड़क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
मरीन ड्राइव को मुंगेर शहर के लिए बाइपास के रूप में विकसित करने की योजना है. इससे शहर के अंदर से गुजरने वाले ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्ता मिलने की उम्मीद है.
कांवरियों के लिए भी आसान होगा सफर
सुलतानगंज से गंगाजल लेकर बाबाधाम जाने वाले कांवरियों के लिए भी प्रस्तावित मार्ग उपयोगी हो सकता है. सुलतानगंज और मुंगेर के बीच बेहतर सड़क संपर्क बनने से यात्रा का एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध होगा.
इसका असर सिर्फ धार्मिक यात्रा पर नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के आवागमन पर भी पड़ सकता है. सड़क बनने के बाद इस पूरे इलाके में परिवहन और संपर्क व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है.
मुंगेर के पर्यटन स्थलों तक पहुंचेगा आसान रास्ता
प्रस्तावित मरीन ड्राइव को पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके माध्यम से मुंगेर के कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होगा.
मुंगेर किला, चंडिका स्थान, कष्टहरणी घाट, योगाश्रम, आईटीआई, खड़गपुर झील, भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य, पीरशाह नूफा का मकबरा और अजगैवीनाथ मंदिर जैसे स्थानों तक आने-जाने में इस सड़क का उपयोग किया जा सकेगा.
गंगा किनारे स्थित घाटों के विकास और नये घाटों के निर्माण की भी योजना परियोजना का हिस्सा है. इससे धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
Bhagalpur News: इन गांवों से होकर गुजरेगा मरीन ड्राइव
परियोजना रिपोर्ट में प्रस्तावित मरीन ड्राइव के रास्ते में आने वाले गांवों और क्षेत्रों की सूची दी गयी है. इनमें हंडियो, मोहिउद्दीनपुर, संग्रामपुर, हिरोदरिया, हंडिया, मोकबिरा, हीरोदियारा, मुंगेर वार्ड एक, ग्रिड किला सेक्शन 12, मुंगेर वार्ड 29, जमालकित्राता, बासदेवपुर, अमरपुर, माधोकित्ता, हरनाथपुर बरारी, हरनाथपुर करारी, खेमनरनपुर, सिरमतपुर, चक अली, माहुली, माहुली 151, चक बीर, अजोध्या, चक इब्राहिमपुर, शंकरपुर, सिकंदरपुर, सितालपुर, परसोतीमपुर, मिर्जापुर बराडा, नाकरा, नौगढ़ी, तारापुर दियारा, बिनदियारा, निरपुर 78, निरपुर 77 और कटगोला शामिल हैं.
इन इलाकों के लिए परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी. बेहतर कनेक्टिविटी के साथ स्थानीय बाजार, परिवहन, पर्यटन और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद है.
Bhagalpur News: पर्यावरण मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम
फिलहाल परियोजना निर्माण से पहले पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया में है. स्थलीय जांच और वृक्ष संरक्षण योजना तैयार की जा चुकी है.
अब वन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के निर्माण की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होगी. 42 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद भागलपुर-सुलतानगंज-मुंगेर क्षेत्र में सड़क संपर्क के साथ पर्यटन और यातायात व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव आने की संभावना है.
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