भागलपुर के कचरे से बनेगी गैस, 10 एकड़ में CBG प्लांट लगाएगा HPCL, नगर निगम पर नहीं पड़ेगा खर्च
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भागलपुर के शहरों से निकलने वाले कचरे को अब फेंका नहीं जाएगा, बल्कि उससे कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद तैयार की जाएगी. 10 एकड़ जमीन पर HPCL द्वारा प्लांट स्थापित किया जाएगा, जिससे नगर निगम पर वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा.
Bhagalpur News: भागलपुर के शहरों में रोज निकलने वाला कचरा अब सिर्फ डंपिंग यार्ड तक पहुंचने वाला बोझ नहीं रहेगा. इसी कचरे से गैस और जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम शुरू हो गया है. भागलपुर में करीब 10 एकड़ जमीन पर कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित किया जाएगा. खास बात यह है कि प्लांट की स्थापना और संचालन का पूरा खर्च नगर निगम को नहीं उठाना होगा. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को भागलपुर नगर निगम क्षेत्र के लिए यह काम आवंटित किया गया है.
राज्य के चार प्रमुख नगर निगमों गयाजी, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहारशरीफ में शहरी कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन और उससे गैस उत्पादन की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है. राज्य सरकार ने इन चारों नगर निकायों में CBG प्लांट लगाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों को 10-10 एकड़ जमीन 25 वर्षों के लिए उपयोग के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी है.
भागलपुर के लिए जमीन पहले से उपलब्ध है, जिससे यहां परियोजना को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण बाधा पहले ही दूर हो गयी है.
कचरे से बनेगी गैस, नगर निगम पर नहीं पड़ेगा प्लांट का खर्च
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्लांट लगाने का वित्तीय बोझ नगर निगम पर नहीं पड़ेगा. संयंत्र की स्थापना के लिए होने वाले पूंजीगत व्यय और संचालन पर होने वाले खर्च का वहन संबंधित तेल एवं गैस कंपनी करेगी.
भागलपुर में HPCL को यह जिम्मेदारी दी गयी है. यानी शहर से निकलने वाले जैविक कचरे को प्लांट तक पहुंचाने और उपलब्ध कराने में नगर निगम की भूमिका होगी, जबकि कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और गैस उत्पादन का काम कंपनी करेगी.
यह पहल स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और केंद्र सरकार की गोबरधन योजना के तहत की जा रही है.
नगर निगम देगा कचरा और जरूरी बुनियादी सुविधाएं
CBG प्लांट के लिए नगर निगम को कुछ जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी. इनमें अलग किया हुआ जैविक कचरा, प्लांट तक सड़क संपर्क, जलापूर्ति, बिजली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं.
इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने में होने वाले खर्च की आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभाग से पूर्ति की जाएगी. इस तरह परियोजना के लिए नगर निगम को प्लांट की स्थापना और संचालन का बड़ा वित्तीय भार नहीं उठाना होगा.
25 साल बाद नगर निगम को मिलेगा प्लांट
परियोजना को लंबे समय के लिए तैयार किया गया है. कंपनियों को 10 एकड़ जमीन 25 वर्षों के लिए मुफ्त उपयोग के लिए उपलब्ध करायी जाएगी.
25 साल की अवधि पूरी होने के बाद प्लांट संबंधित नगर निगम को सौंप दिया जाएगा. इसका मतलब है कि लंबे समय में नगर निगम को कचरा प्रबंधन के साथ एक तैयार परिसंपत्ति भी मिल सकेगी.
लैंडफिल साइट का बोझ घटेगा, मीथेन उत्सर्जन भी कम होगा
शहरों के लिए इस परियोजना का महत्व केवल गैस उत्पादन तक सीमित नहीं है. रोजाना निकलने वाले जैविक कचरे का बड़ा हिस्सा यदि वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस होकर CBG और जैविक खाद में बदलता है, तो डंपिंग यार्ड पर जाने वाले कचरे की मात्रा भी कम होगी.
इससे पारंपरिक लैंडफिल साइट पर दबाव घटने की उम्मीद है. जैविक कचरे के खुले या असंगठित तरीके से पड़े रहने से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में भी कमी आ सकती है.
यानी एक ही परियोजना के जरिए कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, वैकल्पिक ईंधन और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने की कोशिश की जा रही है.
भागलपुर के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
भागलपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में कचरा प्रबंधन लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. शहर की आबादी और गतिविधियां बढ़ने के साथ रोजाना निकलने वाले कचरे की मात्रा भी बढ़ती है.
ऐसे में यदि जैविक कचरे को अलग कर उसे प्लांट तक पहुंचाया जाता है, तो कचरे को सिर्फ फेंकने के बजाय उससे उपयोगी उत्पाद तैयार किया जा सकेगा. इससे एक ओर डंपिंग साइट का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर शहर को वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन में योगदान देने का अवसर मिलेगा.
हालांकि, परियोजना की सफलता इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि घर और बाजार स्तर पर जैविक कचरे का अलग-अलग संग्रह कितना प्रभावी तरीके से किया जाता है. कचरे का पृथक्करण ठीक नहीं होने पर प्लांट को पर्याप्त गुणवत्ता वाला जैविक कचरा उपलब्ध कराना चुनौती बन सकता है.
तैयार गैस के लिए पहले से मौजूद बाजार
परियोजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू गैस की बिक्री से जुड़ा है. संबंधित तेल एवं गैस कंपनियों के पास पहले से गैस के खरीदार उपलब्ध हैं. इसके अलावा गैस वितरण नेटवर्क और CNG पंपों की उपलब्धता के कारण उत्पादित गैस के उपयोग की व्यवस्था भी अपेक्षाकृत आसान हो सकती है.
शहरी जैविक कचरे से तैयार गैस को बायो-CNG के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसके साथ ही प्रक्रिया से जैविक उर्वरक भी तैयार होगा.
इससे कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में भागलपुर को एक नई व्यवस्था मिल सकती है.
Bhagalpur News: सरकार ने जारी किया संकल्प पत्र
इस परियोजना को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडलकट्टी ने संकल्प पत्र जारी किया है. इसके तहत राज्य के चार नगर निगमों में CBG प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने और परियोजना संचालन की व्यवस्था तय की गयी है.
अब भागलपुर में परियोजना को जमीन, कचरे की आपूर्ति और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं से जोड़ते हुए आगे बढ़ाने की तैयारी है.
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