भागलपुर ब्लास्ट: बारूद के स्टॉक पर सवालों के घेरे में पुलिस, वर्षों से हो रहे धमाके पर भी नहीं टूटी नींद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Mar 2022 2:44 PM
भागलपुर धमाके के अब आतंकी कनेक्शन की भी जांच हो रही है. जिले में पटाखा बनाने का लाइसेंस किसी के पास नहीं है उसके बाद भी पुलिस की नाक के नीचे बीच शहर में इतना जानलेवा खेल चलना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़ा करता है.
भागलपुर विस्फोट मामले की जांच अब एटीएस भी कर रही है. आतंकवाद निरोधक दस्ता घटनास्थल पर पहुंचकर अब पूरे मामले की जांच कर रही है. गुरुवार देर रात तातारपुर थाना क्षेत्र के कजावलीचक इलाके में हुए धमाके में कई मकान जमींदोज हो गये. 14 लोगों की मौत अब तक हो चुकी है. श्मशान घाट पर एकसाथ सभी शवों का दाह संस्कार कर दिया गया. बच्चों के शव नदी में प्रवाहित किये गये. इतना बड़ा हादसा होने के बाद भले ही तातारपुर थाना अध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया हो लेकिन यह सवाल सामने आया है कि जब जिले में किसी को पटाखा बनाने का लाइसेंस नहीं है तो फिर सरेआम ऐसा खेल पुलिस की नाक के नीचे कैसे खेला गया.
भागलपुर डीएम सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि प्रथम दृष्टया पता चला है कि घर में रह रहा पूरा परिवार पटाखा बनाने के कारोबार से जुड़ा था. पटाखा बनाने में इस घर का उपयोग होता रहा है. पहले भी इस तरह की घटना हुई थी, यह जांच का विषय है. यही बात बिहार के डीजीपी ने भी प्रेस कांफ्रेंस में बतायी.
शुक्रवार को प्रेस वार्ता में डीजीपी ने कहा कि भागलपुर में हाल के दिनों में हुए विस्फोटों की सभी घटनाओं की मॉडस ऑपरेंडी की जांच की जायेगी और यह देखा जायेगा कि सभी के बीच कोई लिंक है या नहीं. इतनी अधिक मात्रा से बारूद वहां कैसे और किसके माध्यम से पहुंचा, इन बातों की भी जांच होगी.
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पहली घटना है जो पुलिस को इतनी लाशों के गिरने के बाद अब जाकर जांच करने की सूझी है. इस घर में 2008 में भी विस्फोट हुआ था. उस वक्त भी तीन लोगों की हुई थी मौत, जिनमें महेंद्र मंडल की पत्नी भी शामिल थी. इसके बाद भी यहां पर विस्फोट हुआ था. इस दौरान इन पर मामला दर्ज हुआ था. इस बार के धमाके में महेंद्र मंडल की भी मौत हुई है. लेकिन पुलिस लगातार हो रही घटना के बाद भी नींद से नहीं जाग सकी. सवाल यह सामने आता है कि यहां बारुद का इतना बड़ा खेल बीच शहरी इलाके में कैसे चल रहा था.
जिले में किसी के पास भी पटाखा बनाने या बेचने का लाइसेंस नहीं है. फिर शहर के बीचोबीच काजवलीचक में विस्फोटक, बारूद और इससे जुड़े खतरनाक वस्तुओं से जुड़ा अवैध कारोबार कैसे हो रहा था. यह बड़ा सवाल है. दूसरी ओर सदर एसडीओ धनंजय कुमार ने बताया कि पटाखे बनाने या बेचने का लाइसेंस किसी को नहीं दिया गया है. काजवलीचक में हुए विस्फोट की घटना की इस एंगल से भी की जायेगी कि आखिर यह कारोबार कैसे किया जा रहा था.
लेकिन सवाल यह सामने आता है कि यहां बारुद का इतना बड़ा खेल बीच शहरी इलाके में कैसे चल रहा था. क्या पुलिस के खुफिया सूत्र अब फेल मान लिये जाएं या फिर कानून का भय ही यहां समाप्त हो चुका है. क्या केवल थानाध्यक्ष पर कार्रवाई कर देने से इतने गंभीर सवाल का जवाब सामने आ सकता है.
Published By: Thakur Shaktilochan
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