Personal Loan Tips: सस्ती EMI देखकर फट से मत लें पर्सनल लोन, पहले चेक करें इन्टरेस्ट रेट

सस्ती EMI देखकर जल्दी लोन लेने से बचें और पहले ब्याज दर और शर्तें जरूर चेक करें.
Personal Loan Tips: पर्सनल लोन आज जितना आसान दिखता है, उतना सीधा नहीं होता है. मिनटों में मिलने वाला यह लोन कई छुपे हुए चार्ज, नियम और शर्तें साथ लाता है, जो बाद में EMI बढ़ा सकते हैं. सिर्फ ब्याज दर देखकर फैसला करना गलत है, क्योंकि प्रोसेसिंग फीस और बाकी शुल्क लोन को महंगा बना देते हैं. कम EMI भी कई बार नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि लंबी अवधि में ब्याज बहुत बढ़ जाता है. प्रीपेमेंट चार्ज भी कई बार मुश्किल खड़ी कर देते हैं. इसलिए पर्सनल लोन लेते समय पूरी जानकारी, सही तुलना और सोच-समझकर उठाया गया कदम ही आपको आगे की परेशानियों से बचा सकता है.
Personal Loan Tips: आजकल पर्सनल लोन लेना बहुत आसान हो गया है. कुछ ही मिनटों में फॉर्म भर दिया जाता है, तुरंत अप्रूवल भी मिल जाता है और कुछ घंटों में पैसे अकाउंट में आ भी जाते हैं. यह पूरी प्रक्रिया किसी को भी आकर्षक लग सकती है, लेकिन इसकी यह आसानियत कई बार ऐसे खर्च और शर्तें छुपा लेती है, जिनका असर EMI शुरू होने के बाद महसूस होता है. क्योंकि पर्सनल लोन बिना किसी गारंटी के दिया जाता है, बैंक इसकी कीमत ब्याज और नियमों के रूप में वसूलते हैं. इसलिए लोन लेते समय जल्दबाजी करना कभी भी समझदारी नहीं होती है. तो आपको लोन लेते वक्त कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए और आज हम बताने जा रहे हैं कि कौन सी वो जरूरी बातें हैं.
क्या ब्याज दर देखकर ही लोन चुन लेना सही है?
ज्यादातर युवा सिर्फ सामने दिख रही ब्याज दर को देखकर फैसला कर लेते हैं, लेकिन पर्सनल लोन की असली लागत इससे कहीं अधिक होती है. प्रोसेसिंग फीस, डाक्यूमेंटेशन चार्ज, इंश्योरेंस और कई बार EMI भरने के तरीके पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है. ये सभी खर्च मिलकर लोन को काफी महंगा बना देते हैं. इसी कारण यह जरूरी है कि सिर्फ ब्याज दर पर भरोसा न करके APR यानी वार्षिक कुल लागत को देखा जाए, क्योंकि यही आंकड़ा बताता है कि आप वास्तविक रूप से कितना महंगा लोन ले रहे हैं.
क्या कम EMI लेना हमेशा फायदेमंद होता है?
कम EMI देखने में बहुत आरामदायक लगती तो है. लेकिन इसके साथ एक बड़ा नुकसान जुड़ा होता है. EMI कम करने के लिए बैंक लोन की अवधि बढ़ा देते हैं, और अवधि बढ़ने से कुल ब्याज भी काफी बढ़ जाता है. पांच साल का लोन जहां कम ब्याज में खत्म हो सकता है, वहीं सात साल का वही लोन आपकी जेब से हजारों-लाखों रुपये अतिरिक्त निकलवा सकता है. थोड़ी अधिक EMI चुनना शुरुआत में मुश्किल लगेगा, लेकिन यह लोन को जल्दी खत्म करता है और कुल लागत कम कर देता है.
क्या प्रीपेमेंट की शर्तें आपको रोक सकती हैं?
कई लोग सोचते हैं कि जैसे ही पैसों की स्थिति सुधरेगी, वे लोन जल्दी चुकाता कर देगें. लेकिन सभी बैंक इसकी अनुमति तुरंत नहीं देते हैं. कुछ बैंक शुरुआती महीनों में प्रीपेमेंट रोक देते हैं, जबकि कई बैंक लोन जल्दी बंद करने पर 2 से 5 प्रतिशत तक का शुल्क वसूलते हैं. अगर आप पहले से जानते हैं कि आप लोन जल्दी चुकाना चाहेंगे, तो ऐसे बैंक को चुनना जरूरी है जिसकी प्रीपेमेंट शर्तें आसान हों.
पर्सनल लोन एक सहायक सुविधा है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब इसे समझदारी से लिया जाए. लोन लेने से पहले सभी चार्ज, EMI का बोझ, और आपकी भुगतान क्षमता को ध्यान से समझना बहुत जरूरी है. सही जानकारी और थोड़ी सावधानी आपको उन परेशानियों से बचा सकती है जिनका सामना कई लोग सिर्फ जल्दबाजी के कारण करते हैं.
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लेखक के बारे में
By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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