आठ माह से नहीं हो सकी नदियों की बंदोबस्ती

Updated at : 01 Jul 2019 8:53 AM (IST)
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आठ माह से नहीं हो सकी नदियों की बंदोबस्ती

बंदोबस्ती राशि में सुधार के बाद नहीं अपनायी जा रही खुली नीलामी बोली की प्रक्रिया 8.47 करोड़ की सुरक्षित राशि पर बंदोबस्ती को संवेदकों ने स्वीकारा नहीं, तीन बार टेंडर को करना पड़ा रद्द भागलपुर : जिले में नदियों की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है. यह अक्तूबर 2018 से अटकी है. पहले बंदोबस्ती राशि अधिक […]

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  • बंदोबस्ती राशि में सुधार के बाद नहीं अपनायी जा रही खुली नीलामी बोली की प्रक्रिया
  • 8.47 करोड़ की सुरक्षित राशि पर बंदोबस्ती को संवेदकों ने स्वीकारा नहीं, तीन बार टेंडर को करना पड़ा रद्द
भागलपुर : जिले में नदियों की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है. यह अक्तूबर 2018 से अटकी है. पहले बंदोबस्ती राशि अधिक होने से कोई संवेदक इसके प्रति दिलचस्पी नहीं दिखायी. बंदोबस्ती राशि में सुधार के बाद अब इसका टेंडर नहीं हो रहा है. बंदोबस्ती नहीं होने से बालू उठाव पर प्रतिबंध लगा है. बालू की किल्लत हो गयी है. करोड़ों का राजस्व सरकार को नहीं मिल रहा है. सदर अनुमंडलाधिकारी को खनन पदाधिकारी का पावर मिला है. बावजूद, नदियों की बंदोबस्ती का मामला फाइलों में दबी है.
पहले बंदोबस्ती राशि (सुरक्षित राशि)आठ करोड़ 46 लाख 72 हजार रुपये था. इसमें संशोधित कर बंदोबस्ती राशि पांच करोड़ नौ लाख 10 हजार 933 रुपये किया गया है. इतनी ही सुरक्षित राशि पर खुली नीलामी की बोली की प्रक्रिया अपनायी जानी है. विभागीय पदाधिकारियों की सुस्ती से यह मुमकिन नहीं हो सका है. कुल मिला कर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद नियमावली 2017 खत्म कर दिया गया है. तभी से इसका नये सिरे से बंदोबस्ती नहीं हुआ है.
अवैध बालू का उठाव रोकना विभाग के लिए चुनौती
बालू का उठाव प्रतिबंधित है. बावजूदअवैध रूप से उठाव हो रहा है, जिसे रोक पाना खनन विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती है. हालांकि, जिलास्तरीय खनन टास्क फोर्स की बैठक में खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने की बात हुई है. हर जगह के थाने को घाटों की निगरानी के लिए लिखा गया है. उन्हें अभी तक में तीन से चार बार स्मारित किया गया है.
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