दोषी से जमा कराया गबन की वसूली में चूक राशि

हेडक्वार्टर से आये दो पदाधिकारियों ने की कचहरी चौक के बिजली ऑफिस में राशि गबन मामले की ऑडिट भागलपुर : कचहरी चौक के बिजली ऑफिस में राशि गबन मामले की ऑडिट हेडक्वार्टर से आये दो पदाधिकारियों ने की. ऑडिट रिपोर्ट अगले दो दिनों में हेडक्वार्टर को सौंपी जायेगी. ऑडिट के दौरान ऑडिटर ने भागलपुर में […]
हेडक्वार्टर से आये दो पदाधिकारियों ने की कचहरी चौक के बिजली ऑफिस में राशि गबन मामले की ऑडिट
भागलपुर : कचहरी चौक के बिजली ऑफिस में राशि गबन मामले की ऑडिट हेडक्वार्टर से आये दो पदाधिकारियों ने की. ऑडिट रिपोर्ट अगले दो दिनों में हेडक्वार्टर को सौंपी जायेगी. ऑडिट के दौरान ऑडिटर ने भागलपुर में आरोपित से वसूली में चूक राशि करीब आठ हजार रुपये जमा करवायी गयी. ऑडिट टीम में ऑडिटर दुर्गाचरण चौधरी व आफताब आलम शमिल थे. इस दौरान ऑडिटर ने इंजीनियरों को फटकार भी लगायी. उन्होंने इंजीनियरों से कहा कि आरोपित से गबन राशि जब वसूली गयी, तो इसमें चूक कैसे हुई.
आरोपित से पूरी राशि क्याें नहीं जमा करवायी गयी. इधर, ऑडिट रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सहायक अभियंता विवेक कुमार, आरोपित जूनियर लाइन रमण कुमार, कैशियर विकास कुमार व अन्य पर विभागीय गाज गिर सकती है. बता दें कि फ्रेंचाइजी कंपनी से बिजली व्यवस्था विभाग ने जब अपने हाथ में लिया था, तो इसके ठीक कुछ दिन के बाद ही करीब 1.40 लाख राशि के गबन का मामला प्रकाश में आया था. तभी तत्काल प्रभाव से आरोपित रमण कुमार को निलंबित कर दिया गया था और उनसे करीब 1.12 लाख रुपये की वसूली की गयी थी.
कैशियर भी जवाबदेह : ऑडिट टीम ने इंजीनियरों ने कहा कि गबन राशि के मामले में अगर जूनियर लाइनमैन रमन कुमार दोषी है, तो इंजीनियर व कैशियर भी कम जवाबदेह नहीं है. अगर किसी का एक तो कैशियर का दो इंक्रीमेंट कट सकता है.
वसूली में चूक 34 हजार की राशि मानकर ऑडिट करने पहुंचे थे ऑडिटर
आरोपित से वसूली में चूक 34 हजार की राशि मानकर ऑडिट करने पटना से टीम चली थी, लेकिन ऑडिट में करीब आठ हजार रुपये वसूली के लिए रह जाने की बात सामने आया और उनसे जमा रसीद कटाया गया.
भुगतान के बाद भी दूसरे माह के बिल में समायोजित नहीं हुई राशि : फ्रेंचाइजी कंपनी के जाने के बाद कचहरी चौक के बिजली ऑफिस के काउंटर पर उपभोक्ताओं से बिल कलेक्शन का काम जूनियर लाइनमैन से लिया जा रहा था. जबकि वह टेक्निकल सेक्शन के स्टाफ थे. फिर भी उनसे बिल कलेक्शन का काम लिया गया था.
उपभोक्ताओं द्वारा भुगतान बिल राशि के बाद जब दूसरे माह के बिल में समायोजित नहीं हुआ, तो शिकायत मिलने लगी. बढ़ रही शिकायतकर्ताओं की संख्या पर गबन का मामला सामने आया और कार्रवाई हुई. तब तत्कालीन सुपरिटेंडेंट इंजीनियर एससी सिंह के निर्देश के आलोक में गबन की जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम बनी थी. यह टीम नवंबर, दिसंबर एवं जनवरी 2018 में राजस्व गबन की जांच की थी.
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