वट सावित्री व्रत पर उत्साह श्रद्धा का उमड़ा सैलाब
Updated at : 03 Jun 2019 6:21 AM (IST)
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भागलपुर : वट-सावित्री व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं में उत्साह है. बाजार से घर तक तैयारी पूरी हो गयी है. सोमवार को होने वाले वट-सावित्री व्रत को लेकर बाजार में रविवार को डलिया, पंखा, शृंगार सामान की दुकानों पर व्रतियों की भीड़ उमड़ी. बाजार में फल, डलिया, पंखा, शृंगार के सामान पर महंगाई की मार […]
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भागलपुर : वट-सावित्री व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं में उत्साह है. बाजार से घर तक तैयारी पूरी हो गयी है. सोमवार को होने वाले वट-सावित्री व्रत को लेकर बाजार में रविवार को डलिया, पंखा, शृंगार सामान की दुकानों पर व्रतियों की भीड़ उमड़ी. बाजार में फल, डलिया, पंखा, शृंगार के सामान पर महंगाई की मार थी. महंगाई पर लोगों की श्रद्धा भारी दिखी और व्रतियों की भीड़ उमड़ी. बाजार में भीड़ से लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो गया.
अमावस्या का शुभारंभ दो को, उदया तिथि के अनुसार आज होगा व्रत
ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के बाद अमावस्या पर तीन जून सोमवार को वट-सावित्री व्रत मनाया जायेगा. पंडित रमेश चंद्र झा ने बताया कि अमावस्या तिथि का शुभारंभ दो जून को शाम 4:39 बजे होगा, जो तीन जून को दोपहर 3:31 बजे तक होगा. उदया तिथि के कारण तीन जून को वट-सावित्री व्रत मनाया जायेगा.
ज्योतिषाचार्य डॉ सदानंद झा ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी तिथि का मान 18 घटी से कम हो, तो उसी दिन वट-सावित्री व्रत मनाया जायेगा. साथ ही उससे संबंधित पूजन आदि किया जायेगा. एक दिन पहले व्रती अरवा भोजन पर रहती है.
100 से बढ़कर 120-140 रुपये सैकड़ा लीची, तो खीरा 20-25 से बढ़कर 40-50 रुपये किलो तक बिका
शहर के प्रमुख बरगद पेड़
शहर में बरारी बड़ गाछ चौक, बड़ी खंजरपुर बड़ गाछ चौक, विश्वविद्यालय बड़ गाछ चौक, कोतवाली चौक स्थित बरगद पेड़, तिलकामांझी चौक स्थित बरगद का पेड़, परबत्ती काली स्थान समीप बरगद पेड़ है.
व्रत से संबंधित सामान पूर्व दाम वर्तमान दाम
पंखा 30 रुपये जोड़ा 40 से 50 रुपये जोड़ा
लीची 100 रुपये सैकड़ा 120-140 रुपये सैकड़ा
पीला केला 30-35 रुपये दर्जन 40 रुपये दर्जन
खीरा 20-25रुपये किलो 30-50 रुपये किलो
आम 40 रुपये किलो 50 रुपये किलो
नारियल 20 रुपये पीस 30 रुपये पीस
वट-सावित्री व्रत की विधि व महत्व: डॉ सदानंद झा ने बताया कि वट देव वृक्ष है. वट वृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्र भाग में देवाधिदेव महादेव स्थित रहते हैं. देवी सावित्री भी वट वृक्ष में प्रतिष्ठित रहती हैं. इसी अक्षय वट के पत्र पुटक पर प्रलय के अंतिम चरण में भगवान श्रीकृष्ण ने बालक रूप में मार्केण्डय ऋषि को प्रथम दर्शन दिया था. डाॅ झा बताते हैं कि वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय 108 बार सौभाग्यवती महिलाओं को सूत लपेटना चाहिए.
महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य व कल्याण के लिए वट वृक्ष में कच्चा सूत लपेट कर 108 बार परिक्रमा करती हैं. महिलाओं द्वारा सौभाग्य पेटारी व पूजन सामग्री जैसे सिंदूर, दर्पण, मौली, काजल, मेहंदी, चूड़ी, साड़ी, हिंगूल, स्वर्ण-आभूषण आदि वस्तुएं एक बांस की टोकरी में रखती हैं और वट वृक्ष के नीचे कच्चा सूत लपेट कर पूजा करती हैं.
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