7 साल से जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग ने दबा रखी है फाइल
Updated at : 27 May 2019 7:58 AM (IST)
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भागलपुर : बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम की कॉपी और 266 कोचिंग संस्थानों के निबंधन की फाइल शिक्षा विभाग ने पिछले सात वर्षों से दबा रखी है. इस अधिनियम में प्रावधान है कि जिन संस्थानों का निबंधन किया जायेगा उसमें अग्निशमन यंत्र का होना आवश्यक है, लेेकिन निबंधन नहीं होने से यह अभी तक स्पष्ट नहीं […]
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भागलपुर : बिहार कोचिंग संस्थान अधिनियम की कॉपी और 266 कोचिंग संस्थानों के निबंधन की फाइल शिक्षा विभाग ने पिछले सात वर्षों से दबा रखी है. इस अधिनियम में प्रावधान है कि जिन संस्थानों का निबंधन किया जायेगा उसमें अग्निशमन यंत्र का होना आवश्यक है, लेेकिन निबंधन नहीं होने से यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितने कोचिंग संस्थान के पास अग्निशमन यंत्र है या नहीं.
दूसरी ओर सूरत में एक शैक्षणिक संस्थान में आग लगने से कई बच्चों की झुलसने से मौत हो गयी. अगर ऐसी घटना भागलपुर में हो गयी, तो शिक्षा विभाग के पास शायद ही कोई जवाब हो जिम्मेदारी से बचने का. निबंधन के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट द्वारा जमा कराये गये 13.35 लाख रुपये के बैंक ड्राफ्ट सरकारी खाते में फल-फूल रहे हैं, लेकिन इस बाबत किसी भी स्तर से कोई काम नहीं हो रहा है.
निबंधन की प्रक्रिया पूरी हुई होती, तो छात्र-छात्राओं को सुरक्षा के साथ-साथ वह तमाम सुविधाएं मिलतीं, जो निबंधित संस्थानों के लिए आवश्यक किया गया है. इस संदर्भ में डीइओ मधुसूदन पासवान से बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.
बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम 2010 के तहत निबंधन के लिए संस्थानों में अग्निशमन यंत्र का भी होना है आवश्यक
कोचिंग संस्थानों ने निबंधन के लिए जमा कराया था 13.35 लाख जो सरकारी खातों में फल-फूल रहा
वर्ष 2012-13 में 49, तो 2016 में 217 कोचिंग इंस्टीट्यूट ने निबंधन का दिया था आवेदन और बैंक ड्राफ्ट
अधिनियम में यह है प्रावधान
अधिनियम लागू होने के एक माह में कोचिंग का निबंधन जरूरी
बिना निबंधन कोई भी कोचिंग न तो स्थापित होगा, न ही संचालित
निबंधन की अवधि तीन वर्ष की होगी
शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता स्नातक जरूरी
विभिन्न पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम पूर्ण करने की अवधि, फीस के साथ प्रोस्पेक्टस भी तय हो कोचिंग में ये सुविधाएं हैं जरूरी
अग्निशमन की व्यवस्था
समुचित उपस्कर (बेंच, डेस्क आदि)
पर्याप्त लाइटिंग व्यवस्था (विद्युतीकरण)
पेयजल की सुविधा
शौचालय की सुविधा-जल-मल निकासी व स्वच्छता सुविधाएं
वर्ष 2010 के बाद शुरू हुई थी प्रक्रिया
अपने राज्य में बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम 2010 में लागू हुआ था. 20 मई 2010 को शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर कोचिंग संस्थानों के निबंधन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था. इस पत्र के प्राप्त होने के दो साल बाद वर्ष 2012 से भागलपुर में निबंधन की प्रक्रिया शुरू की गयी थी.
वर्ष 2012 से शुरू हुआ था आवेदन
जब भागलपुर में कोचिंग संस्थानों पर दबाव बनना शुरू हुआ, तो वर्ष 2012-13 में 49 संस्थानों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में आवेदन किया. फिर वर्ष 2016 में 217 संस्थानों ने आवेदन किया. प्रत्येक संस्थान ने नियम के अनुसार 5000 का बैंक ड्राफ्ट भी जमा किया, जिसे सरकारी खाते में जमा कर दिया गया.
आवेदन पाने के बाद यह हुई प्रक्रिया
जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में आवेदन प्राप्त करने के बाद दिसंबर 2016 में जिलाधिकारी के निर्देश पर डीडीसी के नेतृत्व में आवेदनों की स्क्रूटनी के लिए स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गयी. इसमें डीडीसी, डीइओ, स्थापना शाखा के डीपीओ व डीएसओ शामिल किये गये. स्क्रूटनी करने के लिए डीइओ ऑफिस से कई बार डीडीसी के पास फाइल भेजी गयी, लेकिन स्क्रूटनी के लिए बैठक आज तक नहीं हो सकी.
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