सदर अस्पताल में फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं बनने पर छात्राें ने किया हंगामा

Updated at : 10 Apr 2019 6:08 AM (IST)
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सदर अस्पताल में फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं बनने पर छात्राें ने किया हंगामा

भागलपुर : सदर अस्पताल में मंगलवार देर शाम रेलवे अभ्यर्थियों ने फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं बनने से जम कर हंगामा किया. छात्रों को समझाने अस्पताल प्रबंधन जावेद मंजूर और लेखापाल आदित्य कुमार पहुंचे. इनकी बात छात्रों ने नहीं मानी और सीधे चिकित्सक को बुलाने के लिए कहा. एक घंटे से ज्यादा वक्त गुजर गया चिकित्सक नहीं […]

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भागलपुर : सदर अस्पताल में मंगलवार देर शाम रेलवे अभ्यर्थियों ने फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं बनने से जम कर हंगामा किया. छात्रों को समझाने अस्पताल प्रबंधन जावेद मंजूर और लेखापाल आदित्य कुमार पहुंचे. इनकी बात छात्रों ने नहीं मानी और सीधे चिकित्सक को बुलाने के लिए कहा. एक घंटे से ज्यादा वक्त गुजर गया चिकित्सक नहीं आये, तो छात्र सीधे सिविल सर्जन के पास पहुंच अपनी समस्या को रखा.

सीएस ने अस्पताल प्रभारी को फोन कर समाधान करने का निर्देश दिया. छात्र एक बार फिर ओपीडी में आकर कतार में लग गये. शाम पांच बजे तक जब चिकित्सक नहीं आये, तो छात्रों ने फिर हंगामा करना शुरू कर दिया.

आखिर क्यों हंगामा कर रहे थे छात्रआक्रोशित छात्रों ने बताया कि रेलवे लोको पायलट की लिखित परीक्षा हम लोगों ने पास की है. अब मनोविज्ञान की परीक्षा 16 अप्रैल को है, इसमें शामिल होने के लिए हमें मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट की जरूरत है. सुबह आठ बजे से सदर अस्पताल के ओपीडी में कतार में लगे हैं. चिकित्सक साढ़े दस बजे आये और बारह बजे निकल गये.
कुछ छात्रों का काम करने के बाद कह कर गये कि पांच मिनट में आते हैं, लेकिन शाम पांच बजे तक वापस नहीं आये. पीरपैती, कहलगांव, नाथनगर समेत दूर दराज से सभी आये हैं. रेलवे बोर्ड का स्पष्ट निर्देश है मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट सदर अस्पताल का ही मान्य होगा. ऐसे में हमारे पास और कोई चारा नहीं है. यहां से हमें जांच के लिए एक खास चिकित्सक के पास भेजा जा रहा है. जांच रिपोर्ट के लिए 900 रुपये लिया जा रहा है.
यही जांच दूसरी जगह पांच सौ रुपये में हो रही है. दूसरी जगह की जांच रिपोर्ट को सदर के चिकित्सक मान नहीं रहे हैं. मनोविज्ञान की परीक्षा हमें देनी है, लेकिन मानसिक रूप से अस्पताल हमें परेशान कर रहा है. सिविल सर्जन ने अस्पताल प्रभारी को समाधान करने के लिए भेजा. एक घंटे से ज्यादा वक्त हो गया वह नहीं आये. सुबह से कहा जा रहा है कि अस्पताल प्रभारी ही समाधान करेंगे, लेकिन वह कहीं दिखे ही नहीं. चिकित्सक का पता नहीं है.
समझाने पहुंचे मैनेजर से छात्रों ने कहा, हमें चिकित्सक चाहिए : हेल्थ मैनेजर जावेद मंजूर और लेखापाल आदित्य कुमार छात्रों को समझाने पहुंचे. छात्र इनको देख आक्रोशित हो सीधे कहा, हमें चिकित्सक चाहिए. उग्र छात्रों को समझाने का प्रयास किया गया.
सरकारी अस्पताल में नहीं है जांच की व्यवस्था : शाम साढ़े पांच बजे चिकित्सक सदर अस्पताल आये. उन्होंने बताया कि छात्रों का आरोप गलत है. सदर और मायागंज अस्पताल में जांच की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में हम किसी को कहीं नहीं भेज सकते हैं. जो नियम है उसके अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही हम प्रमाण पत्र जारी कर सकते हैं.
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