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अल्ट्रासाउंड मशीन लगी, तो डॉक्टर हुए गायब

Updated at : 25 Mar 2019 6:13 AM (IST)
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अल्ट्रासाउंड मशीन लगी, तो डॉक्टर हुए गायब

भागलपुर : सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा आरंभ होने से पहले ही बंद होने की कगार पर पहुंच गयी है. हालांकि पांच दिन पहले ही अस्पताल में कंपनी के इंजीनियरों ने मशीन को इंस्टाल कर दिया है. अब सवाल यह है कि आखिर इस मशीन को चलाये का कौन. पूर्व सिविल सर्जन डॉ एके ओझा […]

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भागलपुर : सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा आरंभ होने से पहले ही बंद होने की कगार पर पहुंच गयी है. हालांकि पांच दिन पहले ही अस्पताल में कंपनी के इंजीनियरों ने मशीन को इंस्टाल कर दिया है. अब सवाल यह है कि आखिर इस मशीन को चलाये का कौन. पूर्व सिविल सर्जन डॉ एके ओझा ने प्रशिक्षण के लिए डॉ शीला कुमारी और डॉ अल्पना मोइत्रा के नाम से पत्र जारी किया था.

निर्देश के बाद डॉ शीला ने अपने स्वास्थ्य कारणों को हवाला देते हुए प्रशिक्षण में जाने से इंकार कर दिया, जबकि डॉ अल्पना ने प्रशिक्षण जेएलएनएमसीएच अस्पताल में लिया. इसके बाद डॉ अल्पना बीमार हो गयीं. जिलाधिकारी को अपनी बीमारी का हवाला देते हुए लंबी छुट्टी का आवेदन दे दिया. जिसे मानवीय आधार पर डीएम ने छुट्टी स्वीकृत कर दी है. शनिवार से ही डॉ अल्पना छुट्टी पर चली गयीं.
अब कैसे शुरू होगी अल्ट्रासाउंड की सेवा : मशीन इंस्टाल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया था कि एक सप्ताह के अंदर यह सेवा आरंभ कर दी जायेगी. लेकिन फिलहाल जो हालात हैं, उसे देखते हुए इसकी शुरुआत होने की संभावना नहीं नजर आ रही.
जबकि यहां पहुंचने वाली रोजाना करीब बीस से भी ज्यादा गर्भवती महिलाओं के इलाज के दौरान अल्ट्रासाउंड कराने के लिए चिकित्सक लिखते हैं. कभी-कभी प्रसव के पहले भी अल्ट्रासाउंड करा पेट में पल रहे बच्चे की स्थिति को देखा जाता है.
इस हालत में सेवा बाधित होने से मरीज को जेएलएनएमसीएच अस्पताल जाना होता है, या फिर कीसी निजी क्लिनिक में. बाहर में जांच के लिए मरीज को कम से कम पांच सौ से 1000 रुपये तक खर्च करना पड़ता है. वहीं पिछली बार एक महिला चिकित्सक को अल्ट्रासाउंड चलाने का प्रशिक्षण सदर अस्पताल प्रबंधन ने दिलाया था.
कुछ दिनों के बाद महिला चिकित्सक को सदर अस्पताल से नाथनगर रेफरल अस्पताल भेज दिया गया. ऐसे में बताया जा रहा है कि जिले में एक मात्र यही महिला चिकित्सक हैं, जिन्हें अल्ट्रासाउंड की जानकारी है. इस समस्या का समाधान इनको वापस सदर अस्पताल लाकर किया जा सकता है.
चिकित्सक को लाने में भी होगी परेशानी
अल्ट्रासाउंड की जानकार चिकित्सक लोकसभा चुनाव के दौरान तबादला होना मुश्किल ही है. स्वास्थ्य विभाग अगर जल्द से जल्द चिकित्सक को सदर अस्पताल लाना चाहती है, तो चुनाव आयोग को इसकी जानकारी देनी होगी. लंबी प्रक्रिया के बाद यह तबादला हो सकता है. ऐसे में तबादले की संभावना कम ही नजर आ रही है.
इधर, अंग्रेजी दवा लिखेंगे आयुष चिकित्सक
भागलपुर : जिले के सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को कम करने के लिए आयुष चिकित्सक को प्रशिक्षण दिया जायेगा. सरकार छह माह का प्रशिक्षण देंगी. इसके बाद मिले प्रमाण पत्र के आधार पर पीएचसी के इमरजेंसी में कार्य कर सकेंगे. हालांकि इन्हें एमबीबीएस चिकित्सक के अंदर कार्य करना होगा. आयुष चिकित्सक मरीजों को अंग्रेजी दवा लिख सकेंगे. ये एमबीबीएस चिकित्सक के अंदर रह कर इमरजेंसी में कार्य करेंगे.
आयुष चिकित्सक संभाल रहे हैं पीएचसी : पदभार ग्रहण करने के बाद सिविल सर्जन लगातार तीन दिन से विभिन्न पीएचसी का दौरा कर रहे हैं. सन्हौला, गौराडीह व जगदीशपुर के निरीक्षण में चिकित्सकों की कमी देखी गयी. ओपीडी एक एमबीबीएस के हाथ में है.
दूर दराज का इलाका होने की वजह से चिकित्सक यहां इमरजेंसी ड्यूटी करने से बचते है. ऐसे में एमबीबीएस और आयुष चिकित्सक किसी तरह ओपीडी को चला रहे है.
पदस्थापना कर कमी को पूरा करने का प्रयास किया गया, लेकिन यह सफल नहीं हाे सका. हालांकि जिले के आधे से ज्यादा पीएचसी में आयुष चिकित्सक अंग्रेजी दवा मरीजों को लिख रहे है. नियमसंगत यह कार्य नहीं होने से लगातार इस पर सवाल उठ रहा है. इसके बाद सिविल सर्जन ने इन आयुष चिकित्सक को प्रशिक्षण देने की बात कहीं.
छह माह के कोर्स के बाद लिख सकेंगे अंग्रेजी दवा
सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार सिंह ने बताया कि चिकित्सक की कमी को पूरा करने के लिये आयुष चिकित्सक को प्रशिक्षण दिलाया जायेगा. छह माह के इस कोर्स में इन चिकित्सक को बैचलर प्रीपैरेटरी सर्टिफिकेट इन कम्युनिटी हेल्थ फॉर नर्सेस (बीएचसीसीएचएन) का प्रमाण पत्र मिल जायेगा. इग्नू इसके लिए छह माह का प्रशिक्षण देता है.
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