भागलपुर : 90 लाख में एडमिशन की हुई थी डील, कई किश्तों में 35 लाख लिये एडवांस

Updated at : 30 Jan 2019 8:06 AM (IST)
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भागलपुर : 90 लाख में एडमिशन की हुई थी डील, कई किश्तों में 35 लाख लिये एडवांस

भागलपुर : 5 जनवरी 2019 को घोघा के जानीडीह निवासी डाॅ अमरनाथ सिंह द्वारा उनके बेटे के पीजी मेडिकल में एडमिशन के नाम पर ठगी करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिला स्थित भारतीय विद्यापीठ नामक कॉलेज में एमएम ऑर्थोपेडिक कोर्स में एडमिशन कराने के नाम पर ठगी […]

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भागलपुर : 5 जनवरी 2019 को घोघा के जानीडीह निवासी डाॅ अमरनाथ सिंह द्वारा उनके बेटे के पीजी मेडिकल में एडमिशन के नाम पर ठगी करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिला स्थित भारतीय विद्यापीठ नामक कॉलेज में एमएम ऑर्थोपेडिक कोर्स में एडमिशन कराने के नाम पर ठगी करने वाले दलालों ने 90 लाख रुपये की डील की थी. इसे दो किस्तों में देने की बात थी.

मामले में मिली जानकारी के अनुसार किसी माध्यम से डाक्टर और उनके पुत्र ने आदमपुर स्थित पैथोलैब चलाने वाले प्रशांत कुमार उर्फ सोनी से संपर्क किया. उन लोगों को बैंगलुरु में रहने वाले राहुल कुमार नामक युवक से फोन पर बात करायी. बात करने के दौरान राहुल ने मैनेजमेंट कोटा से 90 लाख रुपये (दो किस्तों) में देकर एडमिशन कराने का आश्वासन दिया.
इसके बाद राहुल कुमार द्वारा डाॅक्टर के पुत्र अंकित को विगत 31 मई 2018 को पुणे स्थित भारतीय विद्यापीठ परिसर बुलाया गया. राहुल से फोन पर हुई बात के मुताबिक अंकित ने छह लाख रुपये एसके सिंह उर्फ सत्यम और शिव कुमार नामक व्यक्ति को नकद दिया. पावती रसीद मांगने पर सत्यम और शिव ने नामांकन के बाद रसीद देने की बात कही. घोघा लौटने के बाद राहुल के कहने पर डाक्टर ने दीपक कुमार नामक व्यक्ति के बैंक खाते में दो लाख रुपये जमा करवा दिये. वहीं पांच दिनों के भीतर 19 लाख रुपये का डिमांड किया गया.
पांच दिन के भीतर पैसों का इंतजाम नहीं होने पर मैनेजमेंट द्वारा सीट किसी दूसरे छात्र को देने का झांसा दिया गया. इसके बाद उन्होंने अपने और अपने रिश्तेदाराें से पैसे लेकर 4 जून 2018 को चार लाख रुपये और 8 जून 2018 को 15 लाख रुपये सूरजा नामक व्यक्ति के माध्यम से राहुल को दिया.
इसके बाद राहुल ने नामांकन कराने के लिए उन्हें दोबारा पुणे बुलाया. जहां सत्यम को 1.5 लाख रुपये नकद और घोघा पहुंचने के बाद फिर से 1.5 लाख रुपये सत्यम के बैंक खाते में डलवाये. उक्त पैसे डलवाने के बाद राहुल ने दोबारा फोन कर सत्यम के खाते में पांच लाख रुपये ट्रांसफर करने की बात कही और इसके अलावा शेष राशि का भुगतान और जमा कराये.
सभी पैसों की रसीद नामांकन के बाद लेने का आश्वासन देने लगा. इसके बाद राहुल ने एसके सिंह उर्फ सत्यम के माध्यम से दोबार पुणे बुलाकर पंद्रह लाख रुपये का एक फर्जी रसीद और एक फर्जी एसएमएस भिजवाया. जिसके बाद ठगों ने कई कारणों को बता कर उनके पुत्र का हस्ताक्षर विश्वविद्यालय के एग्रीमेंट दस्तावेज पर करवाया और नामांकन का भरोसा दिला कर दोबारा पैसे ठगने का प्रयास करने लगा.
ठगे जाने का संदेह होते ही डाक्टर और उनके पुत्र ने दिये गये राशि को लौटाने का दबाव बनाया. कानून का सहारा लेने की बात की धमकी के बाद ठगों ने दिसंबर माह में कुल 93 हजार 500 रुपये उनके खाते में लौटाये. उसके बाद ठगों ने उनका फोन उठाना बंद कर दिया. इसके बाद उन्होंने मामले में 5 जनवरी 2019 को ठगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी.
हर दस दिन पर बदल लेते थे अपना मोबाइल नंबर
पुलिस जांच के दौरान इस बात खुलासा हुआ है कि उक्त ठग गिरोह का नेटवर्क राज्य के सभी बड़े शहरों में फैला हुआ है. देश के विभिन्न राज्यों के छोटे जिलों के लोगों को बड़े और नामचीन कॉलेजों में एडमिशन कराने का झांसा देकर लोगों से ठगी करते थे. और लाखों रुपये ठगने के बाद वे लोग अपने मोबाइल नंबर बदल लेते थे और गायब हो जाते थे.
मामले में सत्यम और राहुल से डाक्टर और उनके पुत्र की फोन पर हुई बातचीत का रिकॉर्ड निकालने पर पाया गया है कि ठगों ने हर 10 दिन में अपना मोबाइल नंबर बदला था. वहीं ठग गिरोह के सदस्य ग्राहकों को कॉल करने के लिये ज्यादातर व्हाट्सएप कॉल का सहारा लेते थे.
मामले का मुख्य आरोपित कभी नहीं आया सामने
मामले की जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि एडमिशन के नाम पर ठगी करने वाला मुख्य आरोपित बेंगलुरु में रहने वाला राहुल कभी भी लोगों के सामने नहीं आता था. वह केवल फोन पर लुभावने बातचीत कर लोगों को पहले अपने भरोसे में लेता और उसके बाद उनसे लाखों रुपये की ठगी करता था. मामले में गिरफ्तार सौरभ और सत्यम ने बताया कि उन्होंने ने भी राहुल से केवल फोन पर ही बातचीत की है.
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