सृजन घोटाले का सबसे बड़ा खुलासा : पत्नी के खाते में 35 लाख और गाजियाबाद में फ्लैट की चाबी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Sep 2018 9:03 AM

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भागलपुर : पटना हाइकोर्ट में जिला नजारत के पूर्व नाजिर अमरेंद्र यादव की नियमित जमानत की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के दाखिल जवाब ने अहम राज खोला. अहम आरोपित अमरेंद्र व मनोरमा देवी के गठजोड़ व पहली बार सरकारी राशि के अवैध ट्रांसफर होने पर रिटर्न गिफ्ट की रिपोर्ट सामने आयी. सीबीआई जांच […]

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भागलपुर : पटना हाइकोर्ट में जिला नजारत के पूर्व नाजिर अमरेंद्र यादव की नियमित जमानत की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सीबीआई के दाखिल जवाब ने अहम राज खोला. अहम आरोपित अमरेंद्र व मनोरमा देवी के गठजोड़ व पहली बार सरकारी राशि के अवैध ट्रांसफर होने पर रिटर्न गिफ्ट की रिपोर्ट सामने आयी. सीबीआई जांच में पता चला कि 26 सितंबर 2014 को सृजन खाते में 22 करोड़ रुपये की राशि आते ही मनोरमा देवी ने खूबसूरत रिटर्न गिफ्ट अमरेंद्र यादव को दिया.
आरोपित अमरेंद्र यादव की पत्नी पूजा कुमारी के नाम से खाता खुलवाया और 35 लाख रुपये डाल दिये. गाजियाबाद में पूजा कुमारी के नाम से फ्लैट संख्या-402 की चाबी भी थमा दी. आरोपित अमरेंद्र यादव के ही प्रस्ताव पर इंडियन बैंक की पटल बाबू रोड शाखा में खाता खोला गया, जहां मनोरमा देवी का सृजन महिला विकास सहयोग समिति का भी खाता था.
22 करोड़ की सरकारी राशि मिली तो मनोरमा ने अमरेंद्र को दिया रिटर्न गिफ्ट
जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के निर्देश पर ओबीसी से 12 करोड़ 20 लाख 15 हजार 75 रुपये और पीएनबी बरारी शाखा से नौ करोड़ 75 लाख 63 हजार 47 रुपये की राशि का अलग-अलग चेक इंडियन बैंक, भागलपुर के मैनेजर के नाम से जमा किया. यह चेक बैंक अधिकारियों ने गलती करके सृजन महिला विकास सहयोग समिति के खाते में डायवर्ट कर दिया. इस फ्राड ट्रांसफर में उनका कोई हाथ नहीं है.
तत्कालीन जिलाधिकारी वीरेंद्र कुमार यादव के मौखिक निर्देश पर इंडियन बैंक की भागलपुर शाखा में खाता खोला था.
आला अधिकारियों के इशारे पर इंडियन बैंक में चेक जमा किया और यह चेक अजय कुमार पांडेय को दिया था. अजय कुमार पांडेय ने अपडेट करते हुए पासबुक दिया, जिसमें सरकारी खाता में चेक क्लीयर के बारे में प्रिंट था. ऐसे में विश्वास नहीं करने का कोई कारण नहीं था.
पत्नी के नाम खाता खुलने व 35 लाख रुपये जमा होने के बारे में उन्हें जानकारी नहीं दी. जब यह पता चला कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति की संचालिका स्व मनोरमा देवी ने खाता खुलवाया है तो उसने रुपये को लौटा दिया.
गाजियाबाद में मकान होने व उसका किराया पत्नी के खाते में आने के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
जिप में आरोपित राकेश यादव ने घोटाले की 17 साल की लंबी पारी खेली
भागलपुर : पटना हाइकोर्ट में जिला परिषद में हुए सृजन घोटाले के एक मात्र आरोपित राकेश यादव की जमानत अर्जी पर 17 साल के लंबे कार्यकाल का जिक्र हुआ. आरोपित के बैंक अधिकारियों पर सरकारी राशि के गलत ट्रांसफर का आरोप लगाया और खुद को घोटाले से अनजान कहा. सीबीआई ने जवाब देते हुए कहा कि जिप में आरोपित राकेश यादव ने घोटाले की 17 साल की लंबी पारी खेली. जिप में उनके अलावा कोई भी कैश बुक का संधारण नहीं करता था. उनका ही काम फंड को ट्रेजरी से निकालना और बैंक खाता में जमा कराना था. लंबे समय तक गलत तरीके से राशि निकासी की बात को सरकारी अधिकारी से छिपा कर रखा गया.
सीबीआइ जांच के आधार पर जवाब
जिला नजारत के सहायक नाजिर अमरेंद्र यादव ने 26 सितंबर 2014 को नजारत के उप समाहर्ता को जिलाधिकारी के नाम से पटल बाबू रोड के इंडियन बैंक की शाखा में खाता खोलने का प्रस्ताव दिया. यह प्रस्ताव नजारत के उप समाहर्ता ने मंजूर किया और तत्कालीन जिलाधिकारी वीरेंद्र यादव ने खाता खोलने का फॉर्म साइन करके दिया.
खाता खोलने वाला फॉर्म इंडियन बैंक के क्लर्क और सह-आरोपित अजय कुमार पांडेय ले गया. इस तरह नया बैंक खाता खुला था.
27 सितंबर 2014 को आरोपित अमरेंद्र यादव ने दो चेक 12 करोड़ 20 लाख 15 हजार 75 रुपये और नौ करोड़ 75 लाख 63 हजार 47 रुपये के साथ एक सामान्य नोट हेड नाजिर ओम कुमार श्रीवास्तव व उप समाहर्ता के माध्यम से जमा कराया. यह तत्कालीन डीएम वीरेंद्र यादव ने अप्रूव भी कर दिया.
उक्त दोनों चेक का पहला पन्ना आरोपित अमरेंद्र यादव ने साइन किया और कस्टमर पे-इन स्लिप को चेक बुक इश्यू रजिस्टर में चिपकाया गया. मगर सीबीआइ की 21 जुलाई 2017 की जांच में पाया गया कि बैंक के डिपोजिट स्लिप में राशि सृजन महिला विकास सहयोग समिति के इंडियन बैंक के संबंधित शाखा में ही खुले खाते में चेक की राशि आयी हुई थी. सृजन खाता में चेक का भुगतान उक्त चेक के पीछे में लिखे शब्द- यह राशि सृजन खाता में जमा हो. इसके नीचे डीएम भागलपुर का फर्जी हस्ताक्षर किया हुआ था.
अमरेंद्र कुमार यादव ने बैंक ऑफ इंडिया में अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम से खाता खुलवाया और 35 लाख रुपये की राशि को जमा किया. यह राशि सृजन महिला विकास सहयोग के बैंक ऑफ इंडिया में खुले खाते के चेक से किया गया. यह चेक मनोरमा देवी ने जारी किया. पूजा कुमारी के काटे गये चेक से उक्त राशि स्व मनोरमा देवी के चालक मो अंसार ने नकद निकाला था.
गाजियाबाद में अमरेंद्र यादव की पत्नी पूजा कुमारी के नाम से फ्लैट संख्या-402 खरीदी गयी. सृजन महिला विकास सहयोग समिति के बैंक खाते से 26 लाख रुपये फ्लैट की कीमत चुकायी गयी.
गाजियाबाद के फ्लैट को सोमेश सिन्हा नाम के व्यक्ति को किराया पर दिया गया. सोमेश
सिन्हा द्वारा 13 हजार रुपये प्रति माह पूजा कुमारी के एचडीएफसी के खाता में किराया के रूप में दिया गया.
लेखा टीम ने की टिप्पणी, व्यक्तिगत हित के लिए बड़ी राशि को व्यय में दिखाया गया
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