शिक्षा विभाग के करीब 500 पुरानी फाइलों में लगा दीमक, री-राइट करना होगा मुश्किल

Updated at : 22 Sep 2018 8:47 AM (IST)
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शिक्षा विभाग के करीब 500 पुरानी फाइलों में लगा दीमक, री-राइट करना होगा मुश्किल

भागलपुर : जिला शिक्षा कार्यालय में बर्बाद हो रहे पुरानी फाइलों और कागजातों को री-राइट करने के डीएम के निर्देश के बाद अधिकारियों और लिपिकों का सिरदर्द बढ़ गया है. कागजातों की देखभाल कर रहे लिपिकों का कहना है कि आधे से अधिक फाइल और कागजात चार दशक पुराने हैं. कई कागजातों को दीमक ने […]

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भागलपुर : जिला शिक्षा कार्यालय में बर्बाद हो रहे पुरानी फाइलों और कागजातों को री-राइट करने के डीएम के निर्देश के बाद अधिकारियों और लिपिकों का सिरदर्द बढ़ गया है. कागजातों की देखभाल कर रहे लिपिकों का कहना है कि आधे से अधिक फाइल और कागजात चार दशक पुराने हैं. कई कागजातों को दीमक ने नष्ट कर दिया है. धूल जमने के कारण कागज के किनारे बदरंग हो चुके हैं और कागज के बीच के हिस्से में नमी लगने से स्याही फैल गयी है. इन कागजों को दोबारा री-राइट करना काफी मुश्किल है.
लिपिकों ने बताया कि अनुमान है कि कार्यालय में 20 हजार से अधिक शिक्षकों, कर्मचारियों, पेंशनरों व योजनाओं के रिकार्ड जमा है. वहीं शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न योजनाओं की फाइल भी कार्यालय में इधर-उधर पड़ी हुई हैं. इनमें 500 से अधिक पेंशनरों व पुरानी योजनाओं के रिकार्ड को री-राइट में मुश्किल होगी.
बता दें कि कागजातों की देखभाल व रखरखाव के लिए कार्यालय को भत्ता मिलता है. बावजूद इनकी हालत बद से बदतर हो गयी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी मधुसूदन पासवान ने बताया कि, फाइलों के री राइट करने का काम महीनों चलेगा. जो गैरजरूरी कागजात हैं, उन्हें कार्यालय से हटा दिया जायेगा. जरूरी कागजातों की हार्ड व साॅफ्ट कॉपी तैयार की जायेगी.
फाइलों के सर्वे का काम होगा शुरू: फाइलों को री राइट करने से पहले इनके सर्वे का काम किया जायेगा. जिला शिक्षा कार्यालय से जुड़े स्थापना शाखा, योजना एवं लेखा शाखा में सबसे अधिक पुरानी फाइलें हैं. जबकि मध्याह्न भोजन, आरएमएसए, माध्यमिक शिक्षा जैसी शाखाएं दस से 15 वर्ष पहले स्थापित हुई है. इन शाखाओं के अधिकांश कागजात के रिकार्ड की सॉफ्ट कॉपी तैयार कर ली गयी है.
फाइलों के कारण कार्यालय में जगह की कमी: कार्यालय के स्थापना शाखा के सभी अालमीरा और छज्जे पर फाइलों के ढेर लगे हैं. वर्षों से इन फाइलों को अपनी जगह से हिलाया भी नहीं गया है. वहीं बीते दस वर्षों में तैयार हुए कागजात के लिए लोहे का आलमीरा खरीदे गये हैं. चारों ओर आलमीरा रखने से कार्यालय में जगह की कमी हो गयी है. वहीं लिपिकों के टेबुल व दराज में भी कागजात ठूंसे हुए हैं. लिपिकों ने बताया कि किसी भी कागजात को रद्दी में फेंक भी नहीं सकते. कब इसकी जरूरत पड़ जाये.
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