राकेश की चिता जलते ही बेहोश हुआ भाई, संजीव का अंतिम संस्कार आज

Updated at : 06 Sep 2018 3:46 AM (IST)
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राकेश की चिता जलते ही बेहोश हुआ भाई, संजीव का अंतिम संस्कार आज

भागलपुर : बरारी घाट पर बुधवार को आयुक्त कार्यालय के नाजिर राकेश कुमार सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया. अंतिम संस्कार के वक्त भाई मुकेश सिंह खुद को संभाल नहीं पा रहे थे . परिजनों ने मुकेश को किसी तरह संभाला. वहीं घर में मातमी सन्नाटा छाया हुआ था. रह रह कर राकेश की […]

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भागलपुर : बरारी घाट पर बुधवार को आयुक्त कार्यालय के नाजिर राकेश कुमार सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया. अंतिम संस्कार के वक्त भाई मुकेश सिंह खुद को संभाल नहीं पा रहे थे . परिजनों ने मुकेश को किसी तरह संभाला. वहीं घर में मातमी सन्नाटा छाया हुआ था. रह रह कर राकेश की मां, बहन, पत्नी की रोने की तेज आवाज इस सन्नाटा को अचानक खत्म कर दे रही थी. राकेश की मां और बहन की हालत में कोई सुधार नहीं था. राकेश की बेटी लगातार लोगों को देख रही थी. वह कुछ बोल नहीं रही थी बस अपनी मां की गोद में बैठ कर उसकी आंसू पोछने में लगी थी.

एसडीओ कार्यालय के सामने मंगलवार को गिरे पेड़ की चपेट में आये संजीव कुमार साहा का बुधवार को पोस्टमार्टम करा दिया गया. इनकी बहन दूसरे राज्य से आने वाली है इससे इनका अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह किया जायेगा. हादसे के बाद से परिजनों के आंसू रुक नहीं रहा है. पोस्टमार्टम कराने के बाद जब शव संजीव उर्फ संजीत के घर लाया गया, तो इनकी दो बेटी और पत्नी लिपट गयी. यहां मौजूद लोग अपने आंसू रोकने का प्रयास कर रहे थे. संजीत के पिता डॉ बीपी साहा भी खुद को संभाल नहीं पा रहे थे. कभी अपने बेटे के शव को देखते, तो कभी उसके परिवार को. संजीत का जुड़वा भाई राजीव पूरे परिवार को शांत करा रहा था. जोगसर थाने के पटेल बाबू रोड़ स्थित संजीव के घर में दिन भर लोगों की भीड़ लगी रही.

12 बजे पूरी हुई कागजी प्रक्रिया, देर शाम शव लेकर घर पहुंचे परिजन

मायागंज अस्पताल में संजीव की मौत बुधवार दोपहर चार बजे के करीब हो गयी थी. शव को लेकर परिजन और इनके दोस्त रात भर अस्पताल में ही रहे. सुबह आठ बजे और परिजन आये और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जल्द से जल्द कराने में लग गये. करीब 11 बजे से यह प्रक्रिया आरंभ हुई. शव को शव वाहन में लेकर परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. राजीव साहा ने बताया की संजीव को दो बेटी है. बड़ी सुकृति और छोटी अनन्या सेंट जोसेफ स्कूल में पढ़ती है. बड़ी कक्षा सात में तो छोटी कक्षा एक में शिक्षा ले रही है. घटना के बाद से दोनों बेटी अपने पापा और मम्मी को खोज रही है.भाई का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया जायेगा. एक बहन जो बाहर रहती है वह रात तक पहुंच रही है. इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया आरंभ होगी.

रो रही थी बहन, पूछ रही थी किस बात की भगवान ने सजा दी

घटना की सूचना मिलने के बाद अपने भाई का अंतिम दर्शन करने पूर्णिया से बहन आयी. रोती बहन ने कहा कि भाई की कलाई में राखी बांध कर गयी थी. हमें क्या पता था भगवान हमारे भाई को छीन लेगा. आखिर मेरे भाई का क्या कसूर था. जो असमय उसकी मौत हो गयी.

दोस्तों ने कहा आखिर कितनी मौत के बाद जगेगा प्रशासन

पोस्टमार्टम हाउस में संजीव के दोस्तों की भीड़ लग गयी. सभी ने एक स्वर में सवाल किया. आखिर कब तक शहर का व्यवस्था लोगों की जान लेगा. वन विभाग पेड़ लगाने का आग्रह करता है और फिर सो जाता है. आखिर आम लोग करे तो क्या करे.

सब कह रहे थे गरीबों के दोस्त हैं डॉ बीपी साहा, उनको यह दुख क्यों

नाथनगर चौक पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ बीपी साहा का क्लिनिक है. इलाके के लोगों का इन पर पूरा भरोसा है. ऐसे मरीज जो अपने बच्चे को लेकर यहां आते है और फीस देने की हालत में नहीं रहते हैं. जानकारी होने पर मुफ्त में इलाज करते है.

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