दिन भर एजेंडा पर चली बात, शाम होते ही डिप्टी मेयर व नगर आयुक्त के बीच चले तल्ख तीर

Updated at : 26 Jul 2018 7:56 AM (IST)
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दिन भर एजेंडा पर चली बात, शाम होते ही डिप्टी मेयर व नगर आयुक्त के बीच चले तल्ख तीर

भागलपुर : बुधवार सुबह के साढ़े ग्यारह बजे से निगम सभागार में होनेवाली सामान्य बोर्ड की बैठक अपने नियत समय से एक घंटे लेट से शुरू हुई. ग्यारह बजे से पार्षदों का आना शुरू हो गया था. मेयर और डिप्टी मेयर भी साढ़े ग्यारह बजे तक सभागार में पहुंचे. नगर आयुक्त के कुछ देर से […]

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भागलपुर : बुधवार सुबह के साढ़े ग्यारह बजे से निगम सभागार में होनेवाली सामान्य बोर्ड की बैठक अपने नियत समय से एक घंटे लेट से शुरू हुई. ग्यारह बजे से पार्षदों का आना शुरू हो गया था. मेयर और डिप्टी मेयर भी साढ़े ग्यारह बजे तक सभागार में पहुंचे. नगर आयुक्त के कुछ देर से आने की वजह से बैठक कुछ लेट से शुरू हुई.
मेयर के अध्यक्षीय भाषण के साथ बैठक की कार्यवाही शुरू की गयी. वहीं मेयर ने डिप्टी मेयर को बैठक के संचालन की जिम्मेवारी दी गयी. बैठक शुरू होने के साथ की वार्ड वाइज एजेंडा पर चर्चा शुरू हुई. दिन भर शांतिपूर्ण तरीके से हर वार्ड के एजेंडा पर पार्षदों के सवाल का जवाब नगर आयुक्त देते जा रहे थे. लेकिन तीन बजे के बाद जब वार्ड 38 जो डिप्टी मेयर का वार्ड है, डिप्टी मेयर राजेश वर्मा ने प्रस्ताव संख्या एक के मुख्य बाजार, खलीफाबाग चौक से स्टेशन चौक तक पथ निर्माण कार्य डेढ़ साल पूर्व कार्य आदेश होने के बाद भी काम शुरू नहीं करने पर संवेदक का काली सूची में डालने की बात कही.
उन्होंने कहा कि एक दो संवेदक नगर आयुक्त और योजना शाखा प्रभारी के करीबी हैं. इनको कुछ नहीं हो सकता है. इतना ही नहीं डिप्टी मेयर ने यह कहा कि निगम के सारे विभागों के कामों की उच्चस्तरीय जांच की जाये, जांच हो तो सभी पाये जायेंगे दोषी. अगर दोषी नहीं पाये गये तो मैं डिप्टी मेयर पद से इस्तीफा दे दूंगा. जांच में विभाग के कर्मी दोषी पाये गये तो क्या नगर आयुक्त इस्तीफा देंगे. मुझे पद का मोह नहीं है. डिप्टी मेयर ने कहा कि अगर सही से जांच हो तो करोड़ों का घोटाला उजागर होगा.
किसके पास क्या है, हमसे छुपा नहीं है. मेरे पास प्रमाण है. जांच किससे कराना है मुझे आता है. अगर इसकी उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई तो हमलोग हाइकोर्ट जायेंगे. डिप्टी मेयर ने कहा आप मेरे वार्ड के काम को रोक सकते हैं, मेरे मनोबल को तोड़ नहीं सकते हैं. डिप्टी मेयर की इस तल्ख टिप्पणी का नगर आयुक्त श्याम बिहारी मीणा ने जवाब देते हुए कहा कि आप तथ्यात्मक सबूत दें. इन्क्वायरी -कार्रवाई होगी. उच्च स्तरीय जांच किसकी करायी जाये जिलाधिकारी से. उन्होंने डिप्टी मेयर के इस सवाल का कि आपकी रिकार्डिंग है आपने क्या बोला है. इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि मैं क्या कहा है, उसकी रिकार्डिंग करना सही नहीं हैं. डिप्टी मेयर ने कहा- आप कहते हैं मेरे साथ 25 पार्षद हैं. इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि मुझे डिप्टी मेयर का वार्ड तक मालूम नहीं हैं. मैं राजनीति नहीं करता हूं.
डिप्टी मेयर और नगर आयुक्त के बीच चले तल्खी के तीर से निगम का माहौल गरम हो गया. इस तल्खी के तीर दोनों के बीच चलने के दौरान पार्षदों दो भाग में बंटते दिखे. कई पार्षद डिप्टी मेयर के इस व्यवहार से नाराज दिखे. पार्षद प्रसेनजीत सिंह उर्फ हंसल सिंह ने कहा कि सदन शुरू में सही चल रहा था. डिप्टी मेयर के वार्ड की बारी तो उन्होंने कर्मचारी पर आरोप लगाते हुए सदन का माहौल गर्म कर दिया. जबकि नगर आयुक्त बार-बार आग्रह किया कि कोई प्रमाण है तो मुझे दे मैं कार्रवाई करूंगा.
मुझे लगता है कि यह जो मामला हुआ सोची समझी राजनीति का हिस्सा था. दो तीन पार्षद डिप्टी मेयर को बलि का बकरा बना रहे हैं, इससे विकास कार्य प्रभावित होगा. डिप्टी मेयर को नगर आयुक्त से इस तरह बातें नहीं करनी चाहिए. यह सभी बातें विकास विरोधी बातें हैं. सभी को मिलजुल कर काम करना चाहिए,तभी शहर का विकास संभव है. पार्षद सदानंद चौरसिया ने इस प्रकरण पर कहा कि इस तरह की बातें नहीं चाहिए. डिप्टी मेयर ने जो बात कही नहीं होना था. इस तरह से शहर का विकास रुक जायेगा. वहीं वार्ड 21 के पार्षद संजय कुमार सिन्हा योजना शाखा प्रभारी आदित्य जायसवाल के स्थानांतरण और उनके ऊपर लगे आरोप को लेकर बात की तो, नगर आयुक्त ने योजना शाखा प्रभारी ने सारी बातों की जानकारी दी. कहा कि सफाई को लेकर एक्स्ट्रा लेबर रखा गया था. पेमेंट किया लेकिन टिप्पा नहीं ले पाया था.
तत्कालीन नगर आयुक्त ने जांच की थी. मुझे पैसे जमा करने के लिए कहा गया. मैं उस समय सात हजार रुपये जमा किये, बाकी पैसे हर माह तीन-तीन हजार रुपये अपने सैलरी से कटवाया और 39 हजार रुपये दे दिये. इस पर नगर आयुक्त ने कहा संजय जी यह जनहित का मुद्दा नहीं हैं. जिस आदमी की कार्रवाई पूरी हो गयी है उसे मानसिक रूप से परेशान क्याें किया जा रहा है. इस तरह के मुद्दे खत्म किये जाये.
इस बात का कई पार्षदों ने खुल कर समर्थन किया और कहा कि इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए. वहीं पार्षद प्रमोद लाल द्वारा 27 अप्रैल 2018 काे निगम में घटी घटना के वीडियो फुटेज को सदन में सभी पार्षदों के समक्ष रखने की बात पर नगर आयुक्त ने कहा कि यह मामला कोर्ट में है.
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