शौचालय जाने में आती है शर्म

Updated at : 01 Jul 2018 5:37 AM (IST)
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शौचालय जाने में आती है शर्म

भागलपुर : यह है ओडीएफ गांव. यहां के लोग अब भी पटरी के किनारे या खेत में शौच करने को मजबूर हैं. 2016 के दिसंबर माह में जिले के तत्कालीन डीडीसी अमित कुमार ने नाथनगर प्रखंड के रामपुर खुर्द पंचायत के मुसहरी टोले को ओडीएफ गांव घोषित किया. गांव में सौ से ज्यादा घरों में […]

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भागलपुर : यह है ओडीएफ गांव. यहां के लोग अब भी पटरी के किनारे या खेत में शौच करने को मजबूर हैं. 2016 के दिसंबर माह में जिले के तत्कालीन डीडीसी अमित कुमार ने नाथनगर प्रखंड के रामपुर खुर्द पंचायत के मुसहरी टोले को ओडीएफ गांव घोषित किया. गांव में सौ से ज्यादा घरों में शौचालय निर्माण का दावा पेश किया.

करीब तीन हजार की आबादी वाले ओडीएफ गांव की आज सच्चाई यह है कि खेत में शौच के दौरान दो महिलाओं की मौत सांप के डसने से पिछले साल हो चुकी है. शौचालय तो हर घर में बना, लेकिन किसी में दरवाजा तो किसी की छत गायब. टंकी की गहराई इतनी की एक सप्ताह में यह बीमारी बांटने लगे. महादलित टोले की हर दीवार पर सुंदर गांव का सपना देखा, शौचालय में ही जाना सीखा का नारा अभी भी लिखा है. यह नारा हकीकत को मुंह चिढ़ा रहा है.

10 दिन में बना दिया गांव में शौचालय, छत के लिए नहीं आये ठेकेदार. ग्रामीण भोला मांझी कहते हैं कि सुबह-सुबह हमारे घर में कुछ लोग आये. हमसे कहा कि शौचालय निर्माण कराने आये हैं, कहां बना दे शौचालय. यह कहने के साथ ही लोगों ने हमारे घर के आगे निर्माण कार्य आरंभ कर दिया. दो घंटे में शौचालय की दीवार बना दी, टंकी खोद दी. दरवाजा भी जैसे-तैसे लगा दिया.
छत की बात कहने पर हमसे कहा कि एक साथ सभी लोगों के शौचालय की छत बना कर देंगे. दस दिन बाद जिले से अधिकारी आये, कार्यक्रम हुआ. बाद में हमें पता चला कि हमारा गांव खुले में शौच मुक्त हो चुका है. हकीकत है कि सौ से ज्यादा जो शौचालय बना उसका प्रयोग 2016 से आज तक नहीं हो पाया है. कई बार शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो सकी.
एक साल पहले दो महिलाओं की हो चुकी है मौत. ग्रामीण करण मांझी कहते हैं कि पिछले साल शौच के दौरान दो महिलाओं की मौत गांव में हो चुकी है. चंदा कुमारी और सहेला देवी शौच के लिए खेत में गयी थी, तभी सांप ने डस लिया. जब तक हमें इसकी जानकारी मिलती, उससे पहले ही दोनों की मौत हो चुकी थी. भूल से अगर कोई खेत में शौच करने चला जाता है, तो खेत मालिक झगड़ा के साथ मारपीट को उतारू हो जाते है.
इस परिस्थिति में हमारे पास रेल पटरी और नदी ही सहारा है. हम लोग अपने घर में शौचालय बना भी ले तो पानी कहां से लायेंगे. एक चापानल के सहारे करीब चार सौ की आबादी है. तीन चापानल, जो सरकारी है वह कई साल से खराब है. ऐसी स्थिति में हमारे पास कोई रास्ता नहीं है.
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