घूस लेते गिरफ्तार हुए राजस्व कर्मचारी को 10 साल कारावास, एक लाख रुपये जुर्माना

Updated at : 02 Jul 2024 12:52 AM (IST)
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घूस लेते गिरफ्तार हुए राजस्व कर्मचारी को 10 साल कारावास, एक लाख रुपये जुर्माना

घूस लेते गिरफ्तार हुए राजस्व कर्मचारी को 10 साल कारावास, एक लाख रुपये जुर्माना

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खगड़िया जिला में आठ साल पहले घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार किये गये तत्कालीन राजस्व कर्मचारी कैलाश रजक को 10 साल कारावास की सजा सुनायी गयी. अभियोजन की ओर से दावा किया जा रहा है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भागलपुर स्पेशल विजिलेंस कोर्ट जो 18 जिलों के निगरानी मामलों पर सुनवाई करती है, उसमें यह पहली सजा है. अभियोजन की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि बिहार राज्य में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संभवत: यह सबसे बड़ी सजा सुनायी गयी है. उक्त मामले की सुनवाई भागलपुर व्यवहार न्यायालय के विशेष निगरानी अदालत एडीजे 5 सुदेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत में चली. विगत 26 जून को ही घूसखोरी के आरोपित खगड़िया जिला के अलौली अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी को कोर्ट ने दोषी करार दिया था. सोमवार को मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई की. इसमें भ्रष्टाचार निवाराण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत अधिकांश 7 साल कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 13(2) सहपठित धारा 13 (1)(डी) के तहत 10 साल कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनायी गयी. साथ ही साथ दोनों धाराओं में अर्थदंड की राशि जमा नहीं कराने पर कारावास की अवधि 3-3 माह बढ़ाने का निर्देश दिया गया है. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विजिलेंस एक्ट के स्पेशल पीपी रामबदन कुमार चौधरी और प्रभात कुमार ने बहस में हिस्सा लिया. लोक अभियोजकों ने बताया कि मामले में आठ साल तक चली सुनवाई के दौरान कुल 13 गवाहों को कोर्ट में उपस्थित करा उनकी गवाही करायी गयी. इसमें विजिलेंस के कुल 3 डीएसपी रैंक के पदाधिकारियों को भी बतौर गवाह कोर्ट में उपस्थित कराया गया. क्या था मामला : खगड़िया जिला के अलौली अंचल स्थित स्थित शैन गांव के रहने वाले ग्रामीण संदीप प्रसाद ने विगत 18 जुलाई 2016 को निगरानी थाना, पटना को आवेदन देकर राजस्व कर्मचारी कैलाश रजक द्वारा घूस मांगने के मामले में शिकायत की थी. जमीन की दाखिल खारिज रसीद कटवा लेने के बाद रसीद की प्रति देने के नाम पर कर्मचारी कैलाश रजक ने उनसे 10 हजार रुपये बतौर घूस मांगा. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से डीएसपी तारणी प्रसाद यादव के नेतृत्व में धावादल का गठन किया गया था जो 22 जुलाई को कार्रवाई को खगड़िया पहुंची. धावादल में शामिल एएसआइ भीम सिंह को सूचक संदीप प्रसाद के साथ 10 हजार रुपये के साथ राजस्व कर्मचारी के किराये के मकान पर गये. राजस्व कर्मचारी को रंगेहाथ 10 हजार रुपये के साथ गिरफ्तार किया गया था.

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