बगहा में बीएनएस कानून के तहत पहली हत्या में दोषसिद्धि, 16 को आयेगा सजा पर फैसला
Published by : SATISH KUMAR Updated At : 14 Oct 2025 6:21 PM
पुलिस जिले में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हत्या के एक मामले में पहली बार अभियुक्त को दोषी करार दिया गया है.
बगहा. पुलिस जिले में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हत्या के एक मामले में पहली बार अभियुक्त को दोषी करार दिया गया है. यह मामला जिले में बीएनएस कानून के तहत पहला स्पीडी ट्रायल रहा. जिसकी पूरी प्रक्रिया मात्र तीन माह में पूरी की गई.यह मामला धनहा थाना कांड संख्या 215/2024 से संबंधित है.
पति ने कर दी थी पत्नी सरिता देवी की चाकू से गोदकर निमर्म हत्या
जानकारी के अनुसार, 11 अक्तूबर 2024 को धनहा थाना क्षेत्र के निवासी अमित पटेल ने पारिवारिक विवाद के दौरान अपनी पत्नी सरिता देवी की चाकू गोदकर हत्या कर दी थी.घटना के बाद 12 अक्तूबर 2024 को मृतका के पिता रामदरश पटेल ने धनहा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई. पुलिस ने जांच में तत्परता दिखाते हुए 8 जनवरी 2025 को अमित पटेल के विरुद्ध धारा 103(1) बीएनएस के अंतर्गत आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया. अभियुक्त के घर से हत्या में प्रयुक्त खून से सना चाकू बरामद किया गया था.अभियुक्त 13 अक्टूबर 2025 से जेल में है.
चतुर्थ श्री मानवेन्द्र मिश्र की अदालत ने सजा का निर्धारण 16 अक्तूबरमामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ श्री मानवेन्द्र मिश्र की अदालत में सत्र वाद संख्या 373/2025 के रूप में हुई. न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को आरोप गठन किया और 14 अक्तूबर 2025 को फैसला सुनाया.सजा का निर्धारण 16 अक्टूबर 2025 को किया जाएगा.अपर लोक अभियोजक मन्नू राव ने बताया कि इस मुकदमे में कुल छह गवाह पेश हुए. जिनमें मृतका के पिता रामदरश पटेल,अनुसंधानकर्ता धर्मवीर कुमार भारती, चिकित्सक अशोक कुमार तिवारी, तथा मृतका का नौ वर्षीय पुत्र आयुष पटेल शामिल हैं.
पुत्र आयुष ने देखी थी मां की हत्या,यह बयान मुकदमे में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबितबचपन में अपनी मां की हत्या देखने वाले आयुष ने अदालत में साक्ष्य देते हुए कहा कि “पापा ने मम्मी को मार दिया.” यह बयान मुकदमे में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर अभियुक्त अमित पटेल को दोषी करार दिया. यह मामला जिले में बीएनएस कानून के तहत पहली हत्या में दोषसिद्धि का है, जिसने तीन माह में पूरी हुई सुनवाई के साथ न्यायिक प्रणाली में तेजी और पारदर्शिता का उदाहरण पेश किया है.
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