छह साल बाद भोलेनाथ के दरबार में मिला बिछड़ा बेटा, छलक पड़े पिता के आंसू
वीरेंद्र राम को स्नान करती उसकी धर्मपत्नी
सावन के महीने में वाल्मीकिनगर में एक अद्भुत मिलन हुआ. छह साल से बिछड़ा मानसिक रूप से अस्वस्थ वीरेंद्र अचानक अपने परिवार के सामने आ गया. पिता ने पैर में लगे स्टील रॉड से अपने बेटे को पहचाना, जिसने सभी को भावुक कर दिया.
Valmikinagar News: सावन के पावन महीने में वाल्मीकिनगर में आस्था और इंसानियत का ऐसा मार्मिक संगम देखने को मिला, जिसने सभी को भावुक कर दिया. करीब छह वर्षों से परिवार से बिछड़ा मानसिक रूप से अस्वस्थ वीरेंद्र राम अचानक अपने परिजनों के सामने आ गया. संयोग से परिवार भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने वाल्मीकिनगर पहुंचा था, जहां वर्षों से बिछड़े वीरेंद्र से उनका भावुक मिलन हो गया.
छह साल बाद परिवार से मिला वीरेंद्र
लौरिया थाना क्षेत्र के सिसवा बाजार निवासी वीरेंद्र राम, पिता उगर राम, मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण करीब छह वर्षों से घर से दूर भटक रहा था. परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे और उसके लौटने की उम्मीद लगाए बैठे थे. छह साल का लंबा इंतजार उस समय खुशी में बदल गया, जब पत्नी घरभरनी देवी, पिता उगर राम, बहन, भाई और भतीजे ने उसे वाल्मीकिनगर में देखा.
पैर में लगे स्टील रॉड से पिता ने पहचाना बेटा
वीरेंद्र के पिता उगर राम ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले उसके पैर को देखकर पहचान की. करीब सात वर्ष पहले बैलगाड़ी से गिरने के कारण वीरेंद्र के पैर की हड्डी टूट गई थी और उसमें स्टील का रॉड लगाया गया था.
पैर देखते ही पिता को यकीन हो गया कि सामने मौजूद व्यक्ति उनका ही बेटा वीरेंद्र है. इसके बाद परिजनों ने उसे गले लगा लिया. वर्षों बाद बेटे को सामने देखकर परिवार के सभी सदस्यों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.
मां और पत्नी ने बताया भोलेनाथ की कृपा
वीरेंद्र की मां लालमती देवी ने कहा कि भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनका बेटा छह वर्ष बाद परिवार को मिला है. पत्नी घरभरनी देवी ने भी इस भावुक मिलन को बाबा भोलेनाथ की कृपा बताया.
परिजनों के अनुसार लंबे समय से वीरेंद्र की तलाश की जा रही थी, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल पा रहा था. वाल्मीकिनगर में अचानक हुई मुलाकात ने परिवार की वर्षों पुरानी उम्मीद को खुशी में बदल दिया.
अब होगी वीरेंद्र की घर वापसी
परिजन अब वीरेंद्र को सुरक्षित सिसवा बाजार स्थित अपने घर ले जाने की तैयारी में जुटे हैं. परिवार का कहना है कि छह वर्ष बाद अपने बीच लौटे वीरेंद्र की देखभाल और उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
वाल्मीकि सेवा दल के संतोष रौनियार ने लोगों से गोल चौक स्थित दादा होटल के पास पहुंचकर आवश्यक सहयोग करने की अपील की है.
वाल्मीकिनगर में इंसानियत की मिसाल बना मिलन
सावन के दौरान मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचे परिवार का छह साल से बिछड़े सदस्य से मिलना वाल्मीकिनगर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस भावुक मिलन ने एक बार फिर परिवार, आस्था और इंसानियत के रिश्ते की गहराई को सामने ला दिया.
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By Prabhat Khabar News Desk
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