डायरिया से तीन वर्षीया बच्ची की मौत, छह लोगों का चल रहा इलाज

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 30 May 2024 9:30 PM

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बीहट नगर परिषद के जागीर दास टोला वार्ड-23 में डायरिया से विगत पांच दिनों में तीन लोगों की मौत होने पर ग्रामीण को बीमारी बढ़ने का डर सताने लगा है. गुरुवार को राजेंद्र दास की तीन वर्षीय पुत्री अंशिका कुमारी की घर में ही मौत हो गयी.

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बीहट. बीहट नगर परिषद के जागीर दास टोला वार्ड-23 में डायरिया से विगत पांच दिनों में तीन लोगों की मौत होने पर ग्रामीण को बीमारी बढ़ने का डर सताने लगा है. गुरुवार को राजेंद्र दास की तीन वर्षीय पुत्री अंशिका कुमारी की घर में ही मौत हो गयी. परिजनों ने मासूम को दफना दिया. वहीं इस मौत के बाद से लोगों का शक और गहरा गया है. गांव के आधा दर्जन लोगों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है. वहीं हैरत की बात ये है कि डायरिया से तीन लोगों की मौत के बाद भी स्थानीय ग्रामीण के साथ-साथ स्वास्थ्य महकमा भी मौत के कारणों को लेकर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है. ग्रामीणों की शिकायत के बाद ही गुरुवार को स्वास्थ्य अमला हरकत में आया और गांव जाकर पीड़ित मोहल्ले के लोगों की खून, पेशाब और शौच के सैंपल लेकर जांच करने पहुंची. हालांकि बरौनी सीएचसी के प्रभारी डॉ संतोष कुमार झा द्वारा खुद माॅनीटरिंग करते हुए मोहल्ले में आवश्यक दवाइयों के साथ अस्पतालकर्मियों को लगा रखा है. लेकिन पीड़ित परिवार के लोगों द्वारा सहयोग करने में आनाकानी के चलते भी डायरिया से निबटने में देरी लग रही है. इसके अलावा पानी का भी जांच हेतु सैंपल लिया गया है.जांच टीम में ब्लॉक हेल्थ मैनेजर संजय कुमार, कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर विकाश कुमार, लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार, एएनएम प्रिया, शिल्वी कुमारी सहित आशा बहु भी मौजूद थे. ग्रामीणों की मानें तो दासटोला में गंदगी का ढ़ेर और फिर पिछले दिनों हुई बारिश के अलावा उमस भरी गर्मी तथा कुछ लोगों द्वारा खानपान में असावधानी बरते जाने के बाद गांव में डायरिया ने धीर-धीरे पैर पसार लिये. एक के बाद एक परिवार के लोग बीमार होने लगे.जब तक कुछ समझ पाते तब तक उल्टी दस्त शुरू हो गयी. पहले लक्ष्मण कुमार और फिर उसकी दादी और आज तीन वर्षीय अंशिका की मौत डायरिया से हो गयी. जब गांव में एक बाद एक मौत होने लगी तो ग्रामीणों में दहशत फैल गयी. इसी दहशत में कुछ लोग घर-बार छोड़कर अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लेने पलायन करने लगे हैं. बताते चलें कि नगर परिषद बीहट मे दासटोला की घटना तो एक बानगी भर है,यदि नगर परिषद में साफ-सफाई में लापरवाही हुई तो धोबिया टोल में सड़क पर बहता गंदा पानी और बजबजाते नालियों में पनपते मचछर से कब दासटोला के घटना की पुनरावृति हो जाय तो फिर वहां भगवान ही मालिक हैं. डायरिया के बढ़ते प्रकोप के बाद गुरूवार की सुबह तेघड़ा विधायक रामरतन सिंह, बरौनी बीडीओ अनुरंजन कुमार, बीहट नगर परिषद की मुख्य पार्षद बबीता देवी, उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार, पार्षद अशोक कुमार सिंह दासटोला पहुंचे. मृतकों के परिजन को उचित सहायता दिलाने को लेकर विधायक की पहल पर बरौनी बीडीओ ने कहा कि मृतक की उम्र 18 से 59 साल के बीच में होगी तो राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत अनुदान का लाभ दिया जायेगा. वहीं नगर परिषद बीहट द्वारा कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत तीन-तीन हजार रुपये मृतक के परिजन को मिलेंगे. मौके पर वार्ड-7 पार्षद गौतम कुमार गोपाल, सौरव कुमार सहित अन्य मौजूद थे. वहीं डायरिया का प्रकोप फैलने के बाद विगत पांच दिनों से अपनी परवाह किये बिना वार्ड-23 के पार्षद प्रतिनिधि नारायण सिंह पीड़ित परिवारों के बीच जमे रहे. मरीजों को अस्पताल भेजने से लेकर मृतक की अंत्येष्टि और अस्पताल प्रबंधन द्वारा जांच अभियान में सहयोग देने वाले पार्षद प्रतिनिधि ने कहा दास टोला के मुख्य द्वार पर हमेशा जल जमाव की समस्या को लेकर नगर परिषद का ध्यान आकृष्ट कराता रहा हूं. इतना ही नहीं सबसे बड़ी समस्या पानी निकासी के लिए दस सोख्ता का निर्माण,बीहट बाजार में शौचालय की व्यवस्था के लिए कई बार लिखित में दिया गया लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. विगत रविवार को व्यक्तिगत फंड से मुख्य द्वार पर जल जमाव को हटाया गया है. विदित हो कि जगह और नाला नहीं होने की वजह से दास टोला के लोग घरों का गंदा पानी और कचरा एनएच पर फेंकने को बाध्य हैं. दिन में तीन से ज्यादा बार पानी के साथ अधिक मात्रा में मलत्याग हो रहा हो तो यह डायरिया का लक्षण है. इस रोग से ग्रसित रोगी के शरीर में पानी की अत्यधिक कमी हो जाती है. इससे उसका शरीर कमजोर हो जाता है. यही कारण है कि शरीर में इन्फेक्शन फैलने का खतरा बहुत बढ़ जाता है. सही समय पर सही इलाज नहीं होने पर रोगी की जान भी जा सकती है. सामान्य रूप से डायरिया तीन से सात दिनों तक में ही ठीक होता है. छोटे बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में ज्यादा आते हैं. बार-बार मल त्याग करना. मल बहुत पतला होना या उपरोक्त दोनों ही स्थितियां हो जाना. पतले दस्त जिनमें जल का भाग अधिक होता है. थोड़े-थोड़े समय के अंतर से आते रहना. तीव्र दशाओं में रोगी के पेट के पूरे निचले भाग में दर्द और बेचैनी महसूस होती है. किसी रोगी को यह मलत्याग के कुछ समय पहले अधिक मालूम होती है. पुराना अतिसार रोग अगर बहुत समय तक बने रहे, या थोड़े ही समय में एकदम से रोगी का शरीर कृश हो जाए तो डिहाइड्रेशन की दशा उत्पन्न हो सकती है.

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