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तीज व चौठचंदा को लेकर बाजार में रही भीड़, जमकर हुई खरीदारी

Updated at : 05 Sep 2024 10:20 PM (IST)
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तीज व चौठचंदा को लेकर बाजार में रही भीड़, जमकर हुई खरीदारी

चांग के अनुसार इस बार तीज और चौठ चन्द्र पूजा छह सितंबर शुक्रवार को मनाया जा रहा है. गुरुवार को नहाय खाय का अनुष्ठान किया गया.

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बेगूसराय. पंचांग के अनुसार इस बार तीज और चौठ चन्द्र पूजा छह सितंबर शुक्रवार को मनाया जा रहा है. गुरुवार को नहाय खाय का अनुष्ठान किया गया. नहाय खाय को लेकर गंगा एवं अन्य नदियों तालाबों पर काफी भीड़-भाड़ देखी गयी. तीज व चौठचंद्र पूजन को लेकर बाजारों में काफी भीड़ रही.शहर से लेकर ग्रामीण बाजारों में पूजन सामग्री की अस्थाई बाजार लगाई गयी.पर्व के का विभिन्न फलों के दाम काफी बढ़े हुए थे.भुट्टा 50 रुपये किलो, खीरा 60 रुपये किलो,सेब 130 रुपये किलो से लेकर 200 रुपये किलो तक बिके.इसके अलावे अन्य पूजन सामग्रियों की भी कीमत काफी बढी हुई थी.फिर भी लोग उत्साह व श्रद्धा पूर्वक खरीदारी कर रहे थे. यह पर्व उदया तिथि से तृतीया तिथि 6 सितंबर को दिन के 12:17 तक रहेगा. इसके बाद चौठ तिथि आरम्भ होगा.चौठ चन्द्र के दिन चन्द्रमा की पूजा प्रदोष काल में होती है. इसलिए तीज और चौठ चन्द्र पूजा 6 सितम्बर को मनाई जायेगी.ऐसी मान्यता है कि हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना करने से कुंवारी लड़कियों के विवाह के योग बनते हैं. सुहागिन महिलाओं के द्वारा हरतालिका तीज व्रत करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पति को दीर्घ आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है. सुहागिनों के महापर्व के रूप में प्रचलित हरतालिका तीज भाद्रपद, शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन मनाया जाता है. तीज पर सोलह श्रृंगार करने की परम्परा बहुत पहले से चली आ रही है. भाद्रपद शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है चौठचंद्र चौठ चंद्र पूजा का पर्व हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. जो अमूमन हरतालिका तीज के दिन या इसके अगले दिन पड़ता है. इस दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा होती है. कहते हैं ये वही दिन है जब चंद्रमा को कलंक लगा था. इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से उन्हें कलंक से मुक्ति मिल जाती है. इस दिन माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु के लिए व्रत भी रखती हैं. इस पर्व में गुजिया, पिरुकिया, खीर, पूरी एवं फल अर्पण करने का विशेष महत्त्व है. हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया जाता है. यह पर्व गणपति बप्पा यानी भगवान गणेश जी को समर्पित है. हर साल भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन यह पर्व गणपति बप्पा के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. गणेश चतुर्थी का यह उत्सव पूरे देश में मनाया जाता है. लेकिन महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी का उत्सव बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. वहां यह उत्सव लगातार 10 दिनों तक चलता है. गणेश चतुर्थी के खास अवसर पर लोग घर में गणेश जी की स्थापना करते हैं और पूरे विधि विधान के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं. गणपति बप्पा की कृपा से उनके जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है. यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है.

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