हरिगिरिधाम जाने वाले कांवरियों की सेवा में जुटे ग्रामीण और संगठन, मुस्लिम समुदाय ने भी निभाई अहम भूमिका
शिवभक्तों की सेवा में लगे कार्यकर्ता
Begusarai News : बाबा हरिगिरिधाम कांवड़िया पथ पर मुस्लिम समुदाय और स्थानीय ग्रामीणों ने शिवभक्तों की सेवा कर सामाजिक सौहार्द और मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है.
Begusarai News : बाबा हरिगिरिधाम में तीसरी सोमवारी पर जलाभिषेक के लिए उमड़े शिवभक्तों और कांवरियों की सेवा में पूरे कांवड़िया पथ पर स्थानीय ग्रामीणों के साथ विभिन्न सामाजिक और स्वयंसेवी संगठनों के लोग पूरी रात जुटे रहे. कांवरियों की आस्था और सेवा के इस महापर्व में जगह-जगह ग्रामीणों ने सेवा शिविर लगाकर फल, पानी, शरबत और जूस आदि की व्यवस्था की. इस दौरान धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी शिवभक्तों की सेवा में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई. कांवड़िया पथ पर सेवा का यह दृश्य क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता नजर आया.
कांवरियों को रास्ते में परेशानी न हो, यही रहा सेवा का उद्देश्य
शिवभक्तों की सेवा में लगे लोगों का एक ही उद्देश्य था कि दूर-दराज से पैदल चलकर बाबा हरिगिरिधाम पहुंच रहे कांवरियों को रास्ते में किसी प्रकार की परेशानी न हो. रातभर चल रहे सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई. कई स्थानों पर लंबी दूरी तय कर थके हुए कांवरियों को फल और पेय पदार्थ उपलब्ध कराए गए. शिवभक्तों ने भी सेवा में जुटे लोगों के प्रति आभार जताया और कहा कि रास्ते में मिलने वाली ऐसी सुविधाओं से उनकी थकान काफी कम हो जाती है.
रहमान कम्पटीशन कोचिंग की टीम ने रातभर की शिवभक्तों की सेवा
कांवड़िया पथ पर सबसे खास दृश्य उस समय देखने को मिला, जब रहमान कम्पटीशन कोचिंग के संचालक एच. रहमान और उनकी टीम पूरी रात शिवभक्तों की सेवा में जुटी रही. टीम के सदस्यों ने कांवरियों को फल, पानी और जूस उपलब्ध कराया. लंबी दूरी तय कर थक चुके कांवरियों को राहत देने के लिए टीम के सदस्यों ने उनके पैर दबाकर भी सेवा की. सेवा में जुटे एच. रहमान और उनकी टीम के सदस्यों ने कहा कि कांवरिये किसी एक धर्म के नहीं, बल्कि श्रद्धा और आस्था के यात्री हैं. उनकी सेवा करना मानवता की सेवा है.
रात में चल रहे कांवरियों को मिली राहत
रात के समय लगातार पैदल यात्रा कर रहे कांवरियों को पानी, जूस, फल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं. कई शिवभक्तों ने कहा कि सेवा शिविरों के कारण उन्हें यात्रा के दौरान काफी राहत मिली. सेवा में जुटे लोगों का कहना था कि बाबा हरिगिरिधाम पहुंचने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की सुविधा का ध्यान रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. इसी भावना के साथ लोग पूरी रात कांवड़िया पथ पर डटे रहे.
बिथान के नवयुवक संघ ने भी संभाली सेवा की कमान
कांवरियों की सेवा में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से पहुंचे सामाजिक संगठनों के सदस्य भी सक्रिय रहे. समस्तीपुर जिले के बिथान से नवयुवक संघ के बैनर तले पहुंचे संजीत कुमार, शशिभूषण चौधरी, गौतम और निलेश समेत अन्य सदस्यों ने भी रातभर कांवरियों की सेवा की. नवयुवक संघ के सदस्यों ने कांवड़िया पथ से गुजरने वाले शिवभक्तों को आवश्यकतानुसार पानी और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई तथा उनकी सुविधाओं का ध्यान रखा. दूर जिले से आकर सेवा में शामिल हुए युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था.

गांव-गांव के लोगों ने लगाए सेवा शिविर
पूरे कांवड़िया पथ पर स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही. गांव-गांव के लोगों ने अपने स्तर से सेवा केंद्र बनाए और कांवरियों के लिए पेयजल, फल, जूस, शरबत सहित अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की. कई स्थानों पर युवाओं की टोली देर रात तक सड़क किनारे खड़ी होकर कांवरियों को पानी पिलाती नजर आई. लंबी दूरी से पैदल यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं के लिए ग्रामीणों की यह सेवा किसी राहत से कम नहीं थी.
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आस्था के साथ मानवता का भी दिखा उत्सव
दिन-रात लगातार चल रहे कांवरियों को जहां प्रशासन की ओर से सुरक्षा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं, वहीं स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की सेवा भावना ने पूरे कांवड़िया मार्ग को आस्था के साथ-साथ मानवता के उत्सव में बदल दिया. तीसरी सोमवारी के अवसर पर कांवड़िया पथ पर दिखा यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का संदेश भी देता नजर आया.
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धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर दिया भाईचारे का संदेश
एक तरफ भगवा वस्त्र पहने कांवरिये बाबा भोलेनाथ का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे, तो दूसरी ओर अलग-अलग समुदायों के लोग उनकी सेवा में जुटे थे. बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच सेवा में जुटे लोगों की यह तस्वीर क्षेत्र की सामाजिक एकता की खूबसूरत मिसाल बन गई. कांवरियों की सेवा में धर्म और समुदाय की सीमाएं पीछे छूट गईं और मानवता सबसे आगे नजर आई. यही भावना बाबा हरिगिरिधाम की यात्रा को केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की यात्रा भी बना रही थी.
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