रामसागर मिश्र 16 वर्ष की उम्र में ही आंदोलन में कूद पड़े
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Jan 2020 6:11 AM (IST)
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बेगूसराय : आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं. इस आजादी को प्राप्त करने में जिले के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया .कुछ तो प्रकाश में आ सके तो कुछ लोग पूरी तरह से प्रकाश में नहीं आ पाये. उन्हीं में से एक दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी बेगूसराय […]
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बेगूसराय : आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं. इस आजादी को प्राप्त करने में जिले के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया .कुछ तो प्रकाश में आ सके तो कुछ लोग पूरी तरह से प्रकाश में नहीं आ पाये. उन्हीं में से एक दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी बेगूसराय के तिलक नगर से रामसागर मिश्र का भी एक नाम है.
दिवंगत रामसागर मिश्र बचपन में जब होश संभाला ही था तो अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ किये जा रहे अत्याचार व दमन पर आधारित शासन को देखा था.अंग्रेजों के शोषण से किसान मजदूर सभी हलकान थे. उन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में ही देश को आजाद कराने के सपने पालने लगे.
विभिन्न तरह के क्रियाकलापों में भाग लेने लगे. उनके जीवन में महात्मा गांधी का जबर्दस्त प्रभाव पड़ा. गांधी से प्रभावित होकर वे 1942 के आंदोलन में कूद पड़े, इतना ही नही रामसागर मिश्र के सबसे छोटे भाई शिवसागर मिश्र भी 15 वर्ष की आयु में ही आजादी के लड़ाई में कूद पड़े थे.
1942 के आंदोलन में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नरकटियागंज में गिरप्तार कर उन्हें जेल भेज दिया गया .वहीं छोटे भाई शिवसागर मिश्र को भी मुज्जफरपुर में जुलूस का नेतृत्व करने के दौरान गिरफ्तारी हो गयी थी. लगभग साल भर बाद वे रिहा हुए थे.उस दौर में में युवाओं में देश को आजाद कराने की गजब की दीवानगी थी.
खासकर युवा वर्ग जेल तो जेल फांसी और मौत को भी हंसी खुशी गले लगा लेते थे. रामसागर मिश्र अपने पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे. छोटा भाई शिवसागर मिश्र पांचवें नंबर पर थे. पिता खुदी मिश्र रेलवे में नौकरी करते थे. नरकटियागंज में उनकी तैनाती थी. दिवंगत रामसागर मिश्र अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गये हैं.
परिवार में अभी पत्नी आशा मिश्रा, पुत्र अरुण कुमार मिश्रा, विजय कुमार मिश्रा, पुत्री किरणचंद्रा,आभा सिंह,अलका,कुमुद सिंह हैं. वहीं छोटे भाई स्वतंत्रता सेनानी की तीन पुत्री उषा ठाकुर, छाया ठाकुर, संध्या ठाकुर आज भी अपने पिता के द्वारा अंग्रेजों से लोहा लेने की दास्तां जो सुनी थी.आज भी उनके मस्तिष्क में कैद है.
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर एक आरोपित को किया गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया
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