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बदलेगा कांवर झील का दृश्य और िदनकर विवि की है आस

विपिन कुमार मिश्र, बेगूसराय : 30 मई को केंद्र में एनडीए सरकार के कार्यकाल की शुरुआत होते ही बेगूसराय के लोगों को नयी सरकार और नये सांसद से उम्मीदें बढ़ गयी है. एक बार फिर यहां के लोगों में विकास की आस न सिर्फ जागृत हुई है वरन लोगों का कहना है कि अगर सकारात्मक […]

विपिन कुमार मिश्र, बेगूसराय : 30 मई को केंद्र में एनडीए सरकार के कार्यकाल की शुरुआत होते ही बेगूसराय के लोगों को नयी सरकार और नये सांसद से उम्मीदें बढ़ गयी है. एक बार फिर यहां के लोगों में विकास की आस न सिर्फ जागृत हुई है वरन लोगों का कहना है कि अगर सकारात्मक रूप से विकास की पहल हो तो बेगूसराय जिला एक बार फिर औद्योगिक नगरी के रूप में शुमार हो सकता है. हालांकि नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में ही बेगूसराय जिले को विकास के मानचित्र पर प्रतिष्ठापित करने का प्रयास शुरू कर दिया गया है लेकिन इसे और गति देने की जरूरत है.

बेगूसराय जिले में बंद पड़े हैं सैकड़ों लघु उद्योग :बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह के कार्यकाल में बेगूसराय औद्योगिक नगरी के रूप में शुमार हुआ था. बरौनी थर्मल, बरौनी रिफाइनरी, गढ़हारा यार्ड, बरौनी फर्टिलाइजर, बरौनी डेयरी जैसे बड़े कल-कारखानों के साथ-साथ जिले में सैकड़ों लघु उद्योग कार्यरत थे. जिसमें हजारों की संख्या में कामगारों को रोजगार का अवसर प्राप्त होता था. लेकिन समय के साथ-साथ सब कुछ बदलता चला गया.
कई बड़े उद्योगों पर भी संकट के बादल छाने लगे. वहीं सैकड़ों की संख्या में कार्यरत लघु उद्योगों के चिमनियों से धुआं निकलना बंद हो गया. आज की तिथि में भी इन लघु उद्योगों को किसी उद्धारक का इंतजार है. अगर इसे नये तरीके से पुर्नस्थापित कर दिया जाये तो निश्चित रूप से हजारों की संख्या में बेकार पड़े कामगारों के चेहरे पर मुस्कान लौट सकती है.
शिक्षा में पिछड़ा है बेगूसराय
बेगूसराय जिला शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ है. स्कूल व कॉलेज सिर्फ नामांकन और परीक्षा का केंद्र बन कर रह गया है. उच्च शिक्षा के लिए यहां से प्रत्येक वर्ष सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं दूसरे राज्यों के लिए पलायन कर रहे हैं. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय खोलने कर लंबे समय से मांग हो रही है. नयी सरकार और नये सांसद से बेगूसराय में दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय खोलने की मांग को लेकर सुगबुगाहट होने लगी है.
कांवर के विकास की आस
मंझौल अनुमंडल स्थित कांवर झील का इलाका काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. आज से दो दशक पूर्व इस इलाके में देश और विदेशों से मेहमान पक्षियों का न सिर्फ आगमन होता था वरन इन पक्षियों के कलरव से पूरा इलाका गुंजायमान होता था. आज की तिथि में लगभग 1600 हेक्टेयर भू -भाग में फैले कांवर झील का समुचित विकास नहीं होने से यह इलाका वर्षों से उपेक्षित है. इसी तरह से जिले में कृषि और किसानों के विकास के लिए कुसमहौत में मक्का अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गयी थी लेकिन यह केंद्र भी हाथी का दांत बना हुआ है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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