साढ़े तीन करोड़ खर्च, फिर भी नहीं िमला एक बूंद पानी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Mar 2019 7:28 AM (IST)
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बेगूसराय : गर्मी की आहट शुरू होते ही लोगों में शुद्ध पानी की चिंता सताने लगी है. सरकार भले ही हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा कर रही है. लेकिन विभागीय लापरवाही से उनकी तमाम कवायद धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है. इसकी एक बानगी सदर प्रखंड के नीमाचांदपुरा में देखने […]
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बेगूसराय : गर्मी की आहट शुरू होते ही लोगों में शुद्ध पानी की चिंता सताने लगी है. सरकार भले ही हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा कर रही है. लेकिन विभागीय लापरवाही से उनकी तमाम कवायद धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है. इसकी एक बानगी सदर प्रखंड के नीमाचांदपुरा में देखने को मिल रही है.
यहां जलापूर्ति केंद्र निर्माण व पाइपलाइन बिछाने में साढ़े तीन करोड़ खर्च हुए. फिर भी एक बूंद पानी नसीब नहीं हो सका है. ऐसे में पॉकेट के पैसे से लोग प्यास बुझाने को विवश हैं. ज्ञात हो कि वर्ष 2009 में करीब 60 लाख रुपये की लागत से 50 हजार गैलन पानी क्षमता वाली जलमीनार का निर्माण शुरू हुआ था.
2010 में जलमीनार (पानी टंकी) बनकर तैयार भी हो गयी. सूत्रों की माने तो पंचायत में पाइपलाइन बिछाने में करीब तीन करोड़ रुपये खर्च हुए थे. पाइपलाइन बिछाये जाने के बाद आमलोगों में आस जगी थी कि अब आसानी से शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगी. लेकिन सात वर्षों के बाद भी एक बूंद पानी नहीं मिल सका है.
तीन हजार लोगों के घर में लगा है नल
नीमा व चांदपुरा पंचायत के लोगों के घरों में पानी पहुंचाने के लिए घर-घर नल लगाये गये हैं. जलापूर्ति केंद्र से पानी सप्लाइ नहीं होने से नल भी दिखावा की वस्तु बनकर रह गया है. जानकारी के अनुसार लाखों रुपये की लागत से ठेकेदार के माध्यम से साल भर पूर्व नीमा और चांदपुरा पंचायत के तीन हजार घरों में नल लगाये गये थे. फार्म भरकर पानी कनेक्शन लिया गया था.
सात लाख का जेनरेटर हुआ कबाड़ा
बिजली की किल्लत को देखते हुए जलापूर्ति केंद्र के नियमित संचालन के लिए वर्ष 2007 में सात लाख रुपये का एक बड़ा जेरनेटर भी उपलब्ध करायी गयी थी. एक दिन जेनरेटर चलने के बाद इसका कोई उपयोग नहीं हुआ. जिससे धीर-धीरे यह जेनरेटर खराब हो गया. चूहे ने तार को काट दिया. खुले आसमान में रहने के कारण जेरनेटर में जंग लग गया. आज वह जेनरेटर कबाड़ में तब्दील हो चुका है.
क्या कहते हैं ग्रामीण
विभाग की लापरवाही से यह जलापूर्ति केंद्र शोभा की वस्तु बनी है. जलापूर्ति केंद्र से पानी मिलने लगेंगे तो गांव की एक बड़ी समस्या दूर हो जायेगी.
रविकांत कुमार, युवा नेता, चांदपुरा
जलापूर्ति केंद्र को चालू कराने के लिए कई बार विभाग से गुहार लगायी. लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है. जिला प्रशासन को स्वयं पहल कर इसे चालू कराना चाहिए.
सुरेंद्र सहनी, पूर्व मुखिया, चांदपुरा
अप्रैल से लेकर जुलाई तक पानी की समस्या रहती है. इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग को कड़े कदम उठाने की जरूरत है. इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि भी मौन हैं.
अमरेश कुमार, ग्रामीण, नीमा
जलापूर्ति केंद्र के संचालन के लिए कोई कर्मी पदस्थापित नहीं है. कर्मियों के अभाव व पाइपलाइन लीकेज के कारण यह योजना डेड पड़ा है. विभाग ने बिना कोई सूचना मेरा भी वेतन बंद कर दिया है.
विभा देवी, ऑपरेटर, जलापूर्ति केंद्र, नीमाचांदपुरा
बोले अधिकारी
जलापूर्ति केंद्र चांदपुरा के बारे में जानकारी मिली है. जल्द ही इसे चालू कराया जायेगा.
मो नसीर, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी
अधिकारियों व ठेकेदारों को फायदा पहुंचा है. जनता एक बूंद पानी के लिए त्राहिमाम में है. इस मुद्दे को ले समाज के सभी लोगों को जोरदार आवाज बुलंद करने की जरूरत है.
विरेश कुमार, नीमा
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