बेगूसराय : छोटे कद के बड़े कारनामे, साढ़े तीन फुट के गौतम छात्रों को करा रहे पीएचडी

Updated at : 10 Jan 2019 8:25 AM (IST)
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बेगूसराय : छोटे कद के बड़े कारनामे, साढ़े तीन फुट के गौतम छात्रों को करा रहे पीएचडी

विपिन कुमार मिश्र जो उड़ाते थे उपहास, वे आज ले रहे हैं प्रेरणा बेगूसराय : है अगर तमन्ना बढ़ने की मत उलझो छोटी बातों में, अपनी धुन में बढ़ते जाओ तूफानी काली रातों में. ये पंक्तियां जिले के चेरियाबरियारपुर प्रखंड के विक्रमपुर निवासी और दीवान बहादुर कामेश्वर नारायण महाविद्यालय नरहन, समस्तीपुर में व्याख्याता 42 इंच […]

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विपिन कुमार मिश्र
जो उड़ाते थे उपहास, वे आज ले रहे हैं प्रेरणा
बेगूसराय : है अगर तमन्ना बढ़ने की मत उलझो छोटी बातों में, अपनी धुन में बढ़ते जाओ तूफानी काली रातों में. ये पंक्तियां जिले के चेरियाबरियारपुर प्रखंड के विक्रमपुर निवासी और दीवान बहादुर कामेश्वर नारायण महाविद्यालय नरहन, समस्तीपुर में व्याख्याता 42 इंच (साढ़े तीन फुट) के गौतम पर सटीक बैठती हैं.
गौतम अपनी मेहनत और लगन के कारण अपने कद से कई गुना ऊंचे हो गये हैं. जो लोग कभी उनके नाटे कद का उपहास उड़ाते थे वे ही उनकी काबिलियत के कायल हैं और उनसे प्रेरणा ले रहे हैं. यही नहीं गौतम के मार्गदर्शन में कई छात्र पीएचडी कर रहे हैं. पिता रामनरेश सिंह और माता चमचम देवी ने बताया कि जन्म के दो वर्षों के बाद गौतम अचानक पोलियो का शिकार हो गया. इस कारण से उनका शारीरिक विकास थम गया.
काफी प्रयास के बाद उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं हो पाया. बताया जाता है कि गौतम जब पांच वर्ष का हुआ तो उसमें पढ़ाई की ललक दिखी. 36 वर्षीय गौतम के माता-पिता ने कहा कि उसकी याददाश्त काफी अच्छी है. वह एक बार किसी चीज की जानकारी प्राप्त करने के बाद भूलता नहीं है.
नेट और पीएचडी क्वालीफाइड : छोटे कद के चलते गौतम जब किताब और पेंसिल लेकर घर से निकलते थे तो लोग उनका उपहास उड़ाते थे. स्कूल में भी उनकी शारीरिक बनावट का लोग मजाक उड़ाते थे.
इसके बाद भी गौतम निराश नहीं हुए. प्राथमिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से प्राप्त की. संस्कृत शिक्षा बोर्ड पटना से वर्ष 1998 में 10 वीं की परीक्षा पास की. बीआइआइसी पटना में कला से 12वीं की परीक्षा 2000 में पास की. वर्ष 2005 में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में बीए एवं 2008 में जेआरएचयू चित्रकूट से बीएड एवं 2009 में एमएड किया. इसी क्रम में वह 2009 में एजुकेशन से नेट एवं 2011 में संस्कृत से एमए की परीक्षा पास की. वर्ष 2015 में गौतम ने पीएचडी की. गौतम को वर्ष 2012 में दीवान बहादुर कामेश्वर नारायण महाविद्यालय नरहन समस्तीपुर में व्याख्याता पद पर नियुक्त हुए. वे कॉलेज में छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं.
हिम्मत नहीं हारना चाहिए
गौतम का कहना है कि पहले वे समाज व परिवार के लिए समस्या थे, लेकिन वे अब राष्ट्रीय समस्या के समाधान का हिस्सा बन गये हैं. गौतम समाज को खासकर दिव्यांगों को अपने माध्यम से संदेश देना चाहते हैं कि किसी प्रकार की मजबूरी हो, लेकिन उससे हिम्मत नहीं हारना चाहिए. अगर आप कर्तव्य के प्रति लगनशील हैं तो जो लोग आपको उपहास का पात्र मानते थे, वे ही आपको अपना आदर्श मानने लगेंगे.
प्रोफेसर बन कर बनायी अलग पहचान
व्याख्याता बनने के बाद गौतम जब वर्ग लेने के लिए कॉलेज में जाते हैं तो अब वे मजाक के पात्र नहीं, वरन उनके वर्ग में पूरी तरह से अनुशासन दिखता है. 42 इंच के गौतम की शिक्षा के क्षेत्र में अंतिम अभिलाषा केंद्रीय विश्वविद्यालय तक पहुंचना है. इसके लिए गौतम कठिन मेहनत कर रहे हैं.
गौतम के मार्गदर्शन में दर्जनों छात्र पीएचडी कर रहे हैं. गौतम का कहना है कि शिक्षा और समाज सेवा उनके जीवन का मूल ध्येय है. गौतम राष्ट्रीय महत्व का व्यक्ति बनना चाहते हैं. वे प्रत्येक रविवार को दिव्यांगों से मिलकर उनकी समस्या का समाधान करते हैं.
इस पहल का नाम दर्द ए दिल की दास्तां है. गौतम की सबसे बड़ी खासियत है कि वे किसी भी बड़े से बड़े समारोह का संचालन बखूबी कर लेते हैं. जब वे मंच का संचालन करते हैं तो लोगों के बीच सुर्खियों में होते हैं. इसी का नतीजा है कि समारोह आयोजन कराने से पूर्व लोग गौतम से संपर्क साध कर उनका समय आरक्षित कराते हैं. मंच संचालन की खूबियों को लेकर वे राजनेताओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं.
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