लाह की खेती कर समृद्ध होने वाले कटोरिया के दो किसान हुए पुरस्कृत

Updated at : 06 Aug 2025 9:40 PM (IST)
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लाह की खेती कर समृद्ध होने वाले कटोरिया के दो किसान हुए पुरस्कृत

कुलपति डा श्रीनिवासन राव ने संयुक्त रूप से कटोरिया के दोनों किसानों को बारी-बारी से मंच पर प्रशस्ति-पत्र व अंग-वस्त्र देकर सम्मानित किया

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-बिहार कृष विश्वविद्यालय सबौर के स्थापना दिवस पर मिला पुरस्कार कटोरिया. कटोरिया के आदिवासी बाहुल बंगालगढ गांव में लाह की खेती कर समृद्ध होने वाले दो किसानों बहादुर दास व प्रमिला मुर्मू को बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के स्थापना दिवस पर पुरस्कार मिला है. मुख्य अतिथि सह पूर्व केंद्रीय मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, सांसद अजय मंडल व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के निदेशक कुलपति डा श्रीनिवासन राव ने संयुक्त रूप से कटोरिया के दोनों किसानों को बारी-बारी से मंच पर प्रशस्ति-पत्र व अंग-वस्त्र देकर सम्मानित किया. -बंगालगढ गांव निवासी बहादुर दास एक सीमांत किसान हैं. उनके पास पांच बीघा पहाडी जमीन है. उनहोंने वर्ष 2022 में कृषि विज्ञान केंद्र बांका का भ्रमण कर कृषि वैज्ञानिकों से पलास वृक्षों से आमदनी बढाने का सुझाव मांगा. केवीके के वैज्ञानिकों ने उन्हें पलास के पौधों पर लाह कीडे के पालन का सुझाव दिया. उसके पालन को लेकर प्रशिक्षण प्राप्त करने की सलाह दी. किसान बहादुर दास ने लाह कीडे पालने का प्रशिक्षण लेकर प्रथम चरण में एक सौ पलास के पौधे पर लाह की खेती प्रारंभ की. जिससे पंद्रह किलो चौरी लाह का उत्पादन प्राप्त हुआ. फिर केवीके की सहायता से चौरी लाह को प्रसंस्कृत करके दस किलोग्राम बटन लाह तैया किया. किसान बहादुर दास ने लाह से चूडी, पेपर वेट आदि तैयार करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया. जिससे उन्हें 95 हजार रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ. किसान बहादुर दास के प्रयास को काफी सराहना मिली, अब उनके गांव सहित निकटवर्ती गांवों के अन्य किसान भी लाह की खेती को लेकर प्रोत्साहित हो रहे हैं. -प्रमिला मुर्मू के पास है तीन बीघा पैतृक जमीन बंगालगढ की महिला किसान प्रमिला मुर्मू के पास तीन बीघा पैतृक जमीन है. वह अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन को लेकर जीविका समूह से जुडी. इसी क्रम में केवीके का भ्रमण कर पलास वृक्षों से आमदनी बढाने का सुझाव मांगा. कुछ समय बाद ही लाह कीडे का पालन सह प्रसंस्करण का प्रशिक्षण प्राप्त किया. प्रथम चरण में पचास पलास के पौधों पर लाह की खेती प्रारंभ की. जिससे छह किलो चौरी लाह प्राप्त हुआ. उसे प्रसंस्करण कर आठ किलो बटन लाह तैयार किया. चूडी, लहठी व पेपर वेट तैयार कर करीब 75 हजार रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त की. प्रमिला मुर्मू ने अवशेष से विशेष के सिद्धांत को जमीन पर उतारकर लोगों के लिए पथ प्रदर्शक बनी है.

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SHUBHASH BAIDYA

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