कैबिनेट में मोहर लगने के बाद भी डैम के गाद की सफाई आरंभ नहीं

Updated at : 19 Apr 2025 9:48 PM (IST)
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कैबिनेट में मोहर लगने के बाद भी डैम के गाद की सफाई आरंभ नहीं

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कैबिनेट में मोहर लगने के बाद भी डैम के गाद की सफाई आरंभ नहीं

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संजीव पाठक, बौंसी

बांका जिले के साथ-साथ भागलपुर के समीपवर्ती इलाकों के किसानों का लाइफ लाइन चंदन डैम इन दिनों सुख कर तालाब की शक्ल में तब्दील हो गया है. यह डैम इन दिनों अपने अस्तित्व की लड़ाई खुद लड़ रहा है. मालूम हो की 60 के दशक में चंदन जलाशय बांका, भागलपुर और वर्तमान के झारखंड जिला अंतर्गत गोड्डा जिले के किसानों के लिए अति महत्वपूर्ण जलाशय था .लेकिन विभागीय उपेक्षा, जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैया और रखरखाव की घोर कमी की वजह से लगातार इसमें गाद जमा हो गया. जिसके कारण इसकी जल भंडारण की क्षमता भी आधे से भी कम हो गयी है. मालूम हो की मार्च महीने में ही डैम पूरी तरह सूख चुका है. ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना मुश्किल हो गया है. क्षेत्र के किसान इस बात से काफी परेशान है.

1962 में हुआ था इसका निर्माण

मालूम हो कि चंदन डैम का निर्माण 1962 में सिंचाई के साथ-साथ चंदन डैम के सिंचाई विभाग के अधिकारी कर्मी और स्थानीय लोगों के लिए पेयजल आपूर्ति के लिए की गयी थी. उस वक्त यहां के लोगों को पेयजल की समस्या नहीं होती थी. इसके पानी से लगभग 68000 हेक्टेयर भूमि का पटवन भी होता था. लेकिन बीते दो दशक में चंदन जलाशय की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. इसके 65 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से में गाद जमा हो गया है. जिसकी सफाई नहीं होने से जल भंडारण की क्षमता खत्म होती जा रही है. ऐसे में किसानों को खेती-बाड़ी के लिए यहां से पानी मिलना मुश्किल हो चुका है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा दो बार जलाशय का निरीक्षण कर इसके गाद को हटाने की बात बतायी गयी थी. इसके बाद स्थानीय किसानों को उम्मीद जगी थी कि जल्द इसके सिल्ट को हटा लिया जायेगा. लेकिन पुरी की पूरी योजना ठंडे बस्ती में चली गयी. गाद की वजह से डैम के कुल कैचमेंट एरिया 110000 क्यूसेक एकड़ पर भी प्रभाव पर गया है. पूरे क्षेत्र में यहां से पटवन के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है.

कैबिनेट की बैठक में पुनः गाद निकालने को मिली है हरी झंडी

मालूम हो कि 4 फरवरी को कैबिनेट की बैठक में चंदन जलाशय से गाद निकालने के कार्य को हरी झंडी मिल गयी है. जिसमें बताया गया है कि 10 वर्षों तक ड्रेजिंग के माध्यम से ड़ीसिल्टेशन का कार्य किया जायेगा. इससे सरकार को करीब 75 करोड़ 36 लख रुपए के अनुमानित राजस्व की भी प्राप्ति होगी. 60 वर्षों से इसकी सफाई नहीं हुई है. 19 जून 2018 और इसके बाद 9 जनवरी 2020 को मुख्यमंत्री के द्वारा इसके गाद हटाने की घोषणा की गयी थी. हालांकि अब तक इस दिशा में कार्य शुरू नहीं हुआ है. लेकिन किसानों को उम्मीद है कि जल्द कार्य आरंभ होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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