लाखों खर्च कर बनाया गया सामुदायिक शौचालय बना शोपीस, खड़े हो रहे कई सवाल

प्रखंड क्षेत्र के कौआवरण गांव में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत बने सामुदायिक शौचालय की स्थिति काफी जर्जर है.
बौंसी. प्रखंड क्षेत्र के कौआवरण गांव में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत बने सामुदायिक शौचालय की स्थिति काफी जर्जर है. मालूम हो कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा किया गया था. यह सामुदायिक शौचालय आज अपनी बदहाल स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. स्वच्छता और ग्रामीण सुविधा को ध्यान में रखते हुए बनाए गए इस शौचालय की हालत ऐसी हो चुकी है कि अब यह उपयोग के लायक भी नहीं रह गया है. गांव में आदिवासी समुदाय की संख्या अधिक है और इन्हीं की सुविधा के लिए इस शौचालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि शौचालय के दरवाजे बंद पड़े हैं, चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और रख-रखाव के अभाव में यह पूरी तरह उपेक्षित नजर आ रहा है.
शौचालय के सामने बांधे जा रहे मवेशी
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब शौचालय के सामने मवेशियों को बांधा जाने लगा है, जिससे गंदगी और दुर्गंध का स्तर और बढ़ गया है. यह दृश्य न केवल योजना की विफलता को दर्शाता है, बल्कि संबंधित विभाग की लापरवाही की भी पोल खोलता है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय-समय पर इसकी सफाई और मरम्मत होती रहती, तो यह आज भी उपयोगी साबित हो सकता था. वर्तमान हालात में यह केवल एक बेकार ढांचा बनकर रह गया है. स्थानीय लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि प्रशासन यदि चाहे तो इस शौचालय को मरम्मत कराकर पास के विद्यालय के छात्रों के उपयोग में लाया जा सकता है. इसके लिए केवल साफ-सफाई और थोड़ी बहुत मरम्मत की जरूरत है. अब देखना यह है कि प्रशासन इस ओर कब तक ध्यान देता है और लाखों रुपये की लागत से बनी इस सुविधा को फिर से उपयोगी बनाने के लिए क्या कदम उठाता है. फिलहाल, कौआवरण का यह सामुदायिक शौचालय बदहाली और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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