Banka, कल से शुरू होगा मलमास, एक महीने तक बंद रहेंगे सभी मांगलिक कार्य
Published by : MANISH KUMAR Updated At : 16 May 2026 2:08 PM
17 मई से 15 जून तक रहेगा अधिक मास, पूजा-पाठ और भगवान की आराधना का रहेगा विशेष महत्व
पंजवारा (बांका) से गौरव कश्यप की रिपोर्ट:
रविवार 17 मई से अधिक मास यानी मलमास की शुरुआत हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा.इस दौरान विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश समेत सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे. सनातन परंपरा में इस महीने को भगवान की आराधना, दान-पुण्य और तपस्या के लिए विशेष माना गया है.आचार्य पंडित सुदर्शन झा ने बताया कि अधिक मास को मलमास, पुरुषोत्तम मास, मोल मास, लावन मास और लोंद मास के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने कहा कि जिस महीने सूर्य संक्रांति नहीं होती, वह अधिक मास कहलाता है. सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच पड़ने वाले अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है.उन्होंने बताया कि अधिक मास में केवल भगवान की उपासना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. विवाह, उपनयण, तिलक, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं. सनातन मान्यता के अनुसार इस अवधि में देवता, ऋषि और पितृगण मगध क्षेत्र के प्रमुख तीर्थों में निवास करते हैं.प्रमुख तीर्थों में गयाजी धाम, राजगीर, च्यवनाश्रम, पुनपुना नदी, स्कंद तीर्थ देव, वधुश्रवा को विशेष महत्व प्राप्त है.अधिक मास के दौरान राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले का भी आयोजन होता है.
पंडित झा ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मगधराज जरासंध की मृत्यु के बाद देवता एक माह तक राजगीर में ठहरे थे. वहीं मधु सरवां च्यवन ऋषि की जन्मस्थली माना जाता है. मान्यता है कि यहां स्नान और मधेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन से भक्तों को पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है.उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास में 33 कोटि देवी-देवताओं की प्रसन्नता के लिए 33 पुआ का दान करना शुभ माना जाता है.भागवत महापुराण, पद्म पुराण, देवी भागवत और वाल्मीकि रामायण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में मगध क्षेत्र के इन तीर्थों का उल्लेख मिलता है.
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