फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाली शिक्षिका पर कार्रवाई, सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू

बिहार में फर्जी शिक्षकों के खिलाफ चल रहे निगरानी जांच अभियान में एक और बड़ी सफलता मिली है.
धोरैया. बिहार में फर्जी शिक्षकों के खिलाफ चल रहे निगरानी जांच अभियान में एक और बड़ी सफलता मिली है. धोरैया प्रखंड में तैनात एक शिक्षिका का शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बाद उनकी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), बांका ने इस संबंध में प्रखंड नियोजन इकाई को कड़े निर्देश जारी किए हैं. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा की जा रही जांच के क्रम में प्रोन्नत मध्य विद्यालय, जगतपुर (धोरैया) में कार्यरत शिक्षिका निशा देवी का ‘साहित्यभूषण’ अंकपत्र फर्जी पाया गया. यह प्रमाण पत्र हिंदी विद्यापीठ, देवघर (झारखंड) के नाम पर तैयार किया गया था. निगरानी विभाग द्वारा सत्यापन कराए जाने पर संबंधित संस्थान ने इस अंकपत्र को अवैध घोषित कर दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस निरीक्षक ने धोरैया थाना में शिक्षिका के विरुद्ध कांड संख्या 88/26 दर्ज कराया है. पुलिस अब इस मामले में जालसाजी और धोखाधड़ी के पहलुओं से जांच कर रही है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-सदस्य सचिव, प्रखंड नियोजन इकाई, धोरैया को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि बिहार पंचायत प्रारंभिक विद्यालय सेवा नियमावली, 2020 के तहत संबंधित शिक्षिका से स्पष्टीकरण मांगा जाए. एक सप्ताह के भीतर विभागीय नियमों के अनुसार शिक्षिका को सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. कार्रवाई की रिपोर्ट अविलंब जिला मुख्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे अन्य शिक्षकों में हड़कंप मच गया है. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निगरानी जांच के दायरे में आने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा और उनके विरुद्ध न केवल बर्खास्तगी, बल्कि वेतन वसूली की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है.
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