कब तक दर्द सहेंगी महिलाएं

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बांकाः नया टोला में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पर शुक्रवार को प्रभात खबर गोष्ठी का आयोजन किया गया. मौके पर जुटी सभी महिलाओं व युवतियों ने एक स्वर में कहा कि अब दामिनी के किस्से कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं. कहा कि पहले तो परिवार में ही महिलाओं को सम्मान व […]

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बांकाः नया टोला में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर पर शुक्रवार को प्रभात खबर गोष्ठी का आयोजन किया गया. मौके पर जुटी सभी महिलाओं व युवतियों ने एक स्वर में कहा कि अब दामिनी के किस्से कम होने के बजाय बढ़ रहे हैं. कहा कि पहले तो परिवार में ही महिलाओं को सम्मान व भरोसा मिले. तभी गांव व समाज में उन्हें न्याय मिल पायेगा.

बेटे के साथ-साथ बेटी भी घर और समाज का नाम रोशन कर सकेगी. नया टोला गंगा सदन में आयोजित इस गोष्ठी में समाज की शिक्षित, गृहिणी, समाजसेवी, छात्र व कामकाजी महिलाओं ने हिस्सा लिया. सभी ने बेटियों के दर्द एवं उनके हक के मुद्दे को जोर से उठाया. साथ ही समाधान के बाबत कहा कि सबसे पहले समाज के दूषित सोच वाले लोगों को सोच बदलना होगा. बेटियों के आत्म विश्वास को बुलंद करने के परिवार के साथ साथ समाज को भी कदम कदम मिला कर सहयोग करना होगा. मौके पर रानी देवी ने कहा कि बेटा और बेटी के सोच का पैमाना बदले. रीना देवी ने कहा कि हर वक्त लड़कियों को ही दोषी बताया जाता है मगर छोटी बच्ची के ड्रेस में क्या खराबी होती है कि भेड़िये उन्हें अपनी गलत सोच का शिकार बनाते हैं.

गायत्री देवी ने कहा कि समाज में पल रहे गंदे सोच को बदलना जरूरी है. अपने परिवार में ही युवतियों को पहले सम्मान व भरोसे का सहयोग मिले, हां लड़की को भी इस पर सोचना होगा. रीता सिंह ने कहा कि लड़का और लड़की को समान दर्जा मिले. लड़की को सिर्फ शादी के लिए पढ़ाया जाता है. ऐसा नहीं हो. कार्यक्षेत्र में समानता के नजर से बेटी को देखा जाय. हीन भावना से नहीं. मीनू मिश्र ने कहा कि महिलाओं के घर से बाहर निकलते ही दिक्कते शुरू हो जाती है. खुले वातावरण में आजादी के साथ सोचने का अवसर मिले. भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगे. जोया ने कहा कि अब दुआ है मेरी की दामिनी के दर्द का समाना देश के किसी भी बेटी को न करने पड़ा. सोच बदलना होगा.

मिनाक्षी सिंह ने कहा कि बेटी और बेटे को समान रूप घर व समाज में दर्जा मिले. भेदभाव के लकीर मिटानी चाहिए. रूपा सिंह ने कहा कि युवती किसी भी सूरत में युवकों से कम नहीं है. प्रीति कुमारी ने कहा कि हम किसी से कम नहीं फिर भी भेदभाव क्यों. अमिता सिन्हा पमपम ने कहा कि परिवार और समाज बेटियों को हौंसले से आगे बढ़ने की आजादी तो दे, वे साबित कर देगी कि वह अपने पापा की बेस्ट बेटी है. सभी ने बेटी के शिक्षा व उनके प्रति पुरुष समाज का गंदा नजरिया बदलने के भी नारे बुलंद किये. साथ ही कहा कि बांका के बेलहर में जिस तरह आबरू बचाने के लिए तीन महिलाओं ने नदी में कूद कर जान दे दी. मगर आबरू बचा ली. इस पर सभी को मिल कर गंभीरता से सोचना होगा.

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