पुलिस ने किया गुत्थी सुलझा लेने का दावा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Jul 2016 8:01 AM (IST)
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अचारज से गिरफ्तार हुआ लोही बौंसी. रविवार को देर रात पुलिस के छापेमारी अभियान में बौंसी के अचारज से गिरफ्तार शुभम सौरभ उर्फ लोही पर 2010 में भी बौंसी थाने में एक मामला दर्ज हुआ था. उस वक्त अचारज एक लड़की के अपहरण मामले में इसे नामजद अभियुक्त बनाया गया था. जानकारी के अनुसार, 17 […]
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अचारज से गिरफ्तार हुआ लोही
बौंसी. रविवार को देर रात पुलिस के छापेमारी अभियान में बौंसी के अचारज से गिरफ्तार शुभम सौरभ उर्फ लोही पर 2010 में भी बौंसी थाने में एक मामला दर्ज हुआ था. उस वक्त अचारज एक लड़की के अपहरण मामले में इसे नामजद अभियुक्त बनाया गया था. जानकारी के अनुसार, 17 मार्च को बौंसी थाना कांड संख्या-46/10 के अनुसार दीपक कुमार झा ने गोविंद मंडल के पुत्र लॉली, सावित्री देवी सहित अन्य को नामजद किया था. मालूम हो कि व्यवसायी हत्या कांड में लॉली और बौंसी के सिमरा गांव निवासी प्रफुल्ल यादव ने मुखवीर का काम किया था.
इसकी सूचना पर ही झारखंड के साहबगंज निवासी सावन कुमार सिंह, दुमका के जयकांत यादव और सचिंद्र मिर्धा ने व्यवसायी को रेफरल अस्पताल से कुछ दूरी पर रूपये छिनने का प्रयास किया था. जिसमें विफल होने पर सावन कुमार सिंह ने मृतक दिलीप पंजियारा को सीने में गोली मार दी थी. उधर बौंसी बाजार में लॉली की गिरफ्तारी के बाद तरह-तरह की चर्चा हो रही है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि करीब सुबह के 3 बजे पुलिस की पांच गाड़ियों ने उसके मकान को चारों ओर से घेर लिया और लॉली के साथ अन्य चारों को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया.
बौंसी : व्यवसायी दिलीप पंजियारा की हत्या की गुत्थी घटना के तीन दिन बाद पुलिस प्रशासन ने सुलझा लेने का दावा किया है. पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अभियुक्तों से पूछताछ की जा रही है. मालूम हो कि व्यवसायी की हत्या के बाद पुलिस ने टीम बनाकर जगह-जगह छापेमारी अभियान शुरू कर दी थी. बौंसी, बाराहाट, बांका, अमरपुर, सुईया के थाना अध्यक्ष के साथ-साथ एसडीपीओ शशि शंकर कुमार ने टावर लोकेशन और वैज्ञानिक अनुसंधान के तरीके से अपराधियों के गिरहबान तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की. सूत्रों के अनुसार, 2 जुलाई को जिस वक्त गोली चली थी वहां पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी ने अपराधियों को देखा था. व्यवसायी की हत्या करने दो मोटरसाइकिल पर सवार पांच अपराधी आये थे. इसके पहले अपराधियों ने व्यवसायी के हर पहलू नजर रखा था.
दिलीप जब अपनी दुकान बंद कर घर की ओर चला था, घटना के स्थल के पास पहले से घात लगाये अपराधियों को इसकी पल-पल की सूचना मिल रही थी. पुलिस सूत्रों की मानें तो अपराधियों का मकसद व्यवसायी के पास से मौजूद रुपये छीनना था. अपराधियों को मालूम था कि प्रतिदिन व्यवसायी 2 से 3 लाख रुपये लेकर अपने घर आता है.
हालांकि उस दिन व्यवसायी के थैले में मोटी रकम नहीं थी. बावजूद इसके अपराधियों को देने के बजाय वह उससे उलझ गये. रकम नहीं छीन पाने की स्थिति में अपराधियों ने उनके सीने में गोली दाग दी. अपराधियों को आशंका थी कि व्यवसायी उसे पहचान चुका है.
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