तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है, प्यारी-प्यारी है...

Published at :08 May 2016 5:15 AM (IST)
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तू कितनी अच्छी है, तू कितनी भोली है, प्यारी-प्यारी है...

कटोरिया : हर रिश्ते में मिलावट देखी, कच्चे रंगों की सजावट देखी, लेकिन सालों साल देखा है अपनी मां को, ना ममता में कभी कोई मिलावट देखी. जी हां, सचमुच मां ईश्वर द्वारा भेजी हुई एक फरिश्ता होती है. एक मां की अहमियत वह इनसान ही बता सकता है, जिसने मां को खो दिया है. […]

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कटोरिया : हर रिश्ते में मिलावट देखी, कच्चे रंगों की सजावट देखी, लेकिन सालों साल देखा है अपनी मां को, ना ममता में कभी कोई मिलावट देखी. जी हां, सचमुच मां ईश्वर द्वारा भेजी हुई एक फरिश्ता होती है. एक मां की अहमियत वह इनसान ही बता सकता है, जिसने मां को खो दिया है. चूंकि मां का ही रिश्ता एक ऐसा रिश्ता होता है, जो दुबारा प्राप्त नहीं होता. कटोरिया विधानसभा सीट की राजद विधायक स्वीटी सीमा हेंब्रम कहती हैं कि आज वह जिस मुकाम पर हैं,

उसमें मां स्व सिलोमिना मुर्मू की भूमिका अहम रही है. सातवीं क्लास की पढ़ाई ही कर रही थी कि पिता विजय हेंब्रम मेरी खुशहाल जिंदगी को छोड़ चल बसे. इस विकट परिस्थिति में मां ने काफी संघर्ष करते हुए पढ़ाने-लिखाने आदि का बीड़ा उठाया. शादी कराने के बाद वर्ष 2006 में सिर से मां का भी साया हट गया. चूंकि मेरी प्यारी मां को ईश्वर ने बुला लिया था. श्रद्धेय मां के लिए जितना भी बोलूंगी, वह कम पड़ जायेगा.

कटोरिया पुलिस सर्किल की इंस्पेक्टर सुजाता कुमारी कहती हैं कि मुझे कोई और जन्नत का पता नहीं, क्योंकि हम मां के सानिध्य को ही जन्नत कहते हैं. इस दुनिया में मां से बढ़ कर कुछ भी नहीं है. आज वह जिस मुकाम पर हैं, वह अपनी मां सुशीला देवी की बदौलत. उन्होंने कहा कि पिता मेडिकल ऑफिसर थे,

इसके बावजूद मेरी पढ़ाई के लिए मां खुद गांव में रही. अपने सभी छह बच्चों को उन्होंने अच्छे संस्कार देकर बाहर भेज कर बेहतर शिक्षा उपलब्ध करायी. कपड़ा खरीदने के लिए मिलने वाले पैसों को भी वह बचा कर हमारी शिक्षा पर खर्च करती थी. मां की प्रेरणा से ही खुद आत्मनिर्भर बनी और दोनों बेटा-बेटियों को भी आत्मनिर्भर बना सकी.

कटोरिया की सीडीपीओ निवेदिता सेन कहती हैं कि मुझे मेरी मां लीला सेन ने ही संस्कार दिया कि पढ़ाई व काम के प्रति समर्पित रहो. कठिन मेहनत करने के लिए मां हमेशा प्रेरित करती रही, सदा साथ भी देती रही. मां के संस्कार की बदौलत ही अपने दोनों बेटाें की बेहतर परवरिश कर अनुशासन व कठिन परिश्रम के प्रति मैं भी प्रेरित करती रही.

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