धान अधिप्राप्ति. जिला लक्ष्य से काफी पीछे

Published at :11 Mar 2016 5:45 AM (IST)
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धान अधिप्राप्ति.  जिला लक्ष्य से काफी पीछे

आधी भी खरीद नहीं धान की खेती कर रहे किसान असमंजस में हैं कि वे क्या करें. सरकार पैक्सों में धान की अधिप्राप्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही, तो बिचौलिये अौने-पौने दामों में खरीदने को तैयार बैठे हैं. लोगों की समस्या है, कि कम होने का नाम नहीं ले रही. बांका : जिले में धान […]

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आधी भी खरीद नहीं

धान की खेती कर रहे किसान असमंजस में हैं कि वे क्या करें. सरकार पैक्सों में धान की अधिप्राप्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही, तो बिचौलिये अौने-पौने दामों में खरीदने को तैयार बैठे हैं. लोगों की समस्या है, कि कम होने का नाम नहीं ले रही.
बांका : जिले में धान अधिप्राप्ति की रफ्तार बेहद धीमी है. किसान निराश हो रहे हैं. जबकि राशि की कहीं कोई कमी नहीं है. संबंधित अधिकारी और पैक्स मिलरों की शिथिलता का रोना रो रहे हैं. लेकिन इन सबके बीच जिले में धान की अधिप्राप्ति का लक्ष्य अधोगति की स्थिति में है.
जिले में अबतक सिर्फ तीन लाख क्विंटल धान की अधिप्राप्ति हो सकी है. इसके लिए 24 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान भी हो चुका है. जबकि जिले में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 8.6 लाख क्विंटल है. इस तरह धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य यहां अबतक सिर्फ एक तिहाई ही पूरा हो सका है. जबकि मार्च महीने का आधा बीतने पर है. किसान निराश हो रहे हैं, कि अपनी उपज बेचने के लिए जिन पैक्सों के भरोसे वे रहे, अगर वे धान नहीं ले सके, तो उनका क्या होगा. वैसे भी जिले में कृषि उत्पादों के बाजार पर बिचौलिये हावी हैं. किसानों की धान की पैदावार पर भी उनकी नजर है.
मिलरों की शिथिलता से पहुंच रही बाधा : जिले में धान अधिप्राप्ति को लेकर जो एक बड़ी कमी है. वो यह है कि यहां एक तो मिलरों की संख्या बेहद कम है. और जो मिलर पैक्सों से टैग हैं वे लिये गये धान का चावल बनाकर पैक्सों को देने में अनावश्यक विलंब कर रहे हैं. राज्य खाद्य निगम से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के 42 निबंधित मिलर हैं, विभिन्न पैक्सों से अलग अलग टैग हैं. कई मिलर चावल कुटाई में शिथिलता बरत रहें हैं जिससे धान अधिप्राप्ति अभियान को बाधा पहंुच रही है.
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