काफी पुराना इतिहास है इस दुर्गा मंदिर का

Published at :17 Oct 2015 8:43 PM (IST)
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काफी पुराना इतिहास है इस दुर्गा मंदिर का

काफी पुराना इतिहास है इस दुर्गा मंदिर का फोटो 17 बांका 8 : दुर्गा मंदिर की तसवीर. वैदिक रीति से होती है पूजा हले दी जाती थी भैंसे की बलिप्रतिनिधि, बाराहाट बाराहाट बाजार स्थित दुर्गा मंदिर करीब एक सौ तेरह साल पुराना है. बाजार वासी मंदिर के वर्तमान सचिव राजेंद्र प्रसाद साह बताते हैं कि […]

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काफी पुराना इतिहास है इस दुर्गा मंदिर का फोटो 17 बांका 8 : दुर्गा मंदिर की तसवीर. वैदिक रीति से होती है पूजा हले दी जाती थी भैंसे की बलिप्रतिनिधि, बाराहाट बाराहाट बाजार स्थित दुर्गा मंदिर करीब एक सौ तेरह साल पुराना है. बाजार वासी मंदिर के वर्तमान सचिव राजेंद्र प्रसाद साह बताते हैं कि जमींदार शालीग्राम बाबू द्वारा 1901 में एक छोटे से स्थान पर चदरे की छावनी में देवी की पूजा अर्चना की जाती थी. इसका सारा खर्च जमींदार घराने द्वारा किया जाता था. धीरे धीरे 1954 ई में बाजार वासियों व जमींदार घराने के सहयोग से एक भव्य मंदिर की योजना को सकार किया गया. इसी कड़ी में वर्तमान में मंदिर के अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी कहत हैं कि यहां पूजा आरंभ के समय से ही बकरे की बली के साथ भैंसे की बली भी दी जाती रही है, लेकिन देवी के मंदिर निर्माण के बाद कुछ दिनों के लिये बली प्रथा पर आम सहमति से रोक लगा दी गयी. लोग कहते हैं कि इस फैसले से मंदिर समिति के कुछ सदस्य खुश नही थे. इसलिये यह व्यवस्था ज्यादा दिन तक नही चल पायी .अंतत: यहां पुन: बली प्रथा आरंभ हो गयी. मंदिर में पूर्णत: वैदिक रीति रिवाज से देवी की पूजा अर्चना की जाती है. हाल के सात आठ वर्षों से यहां आम सहमति बनी की भैंसे की बली प्रथा पर रोक लगा दी गयी है. इसके लिये मंदिर के पुजारियों व क्षेत्र के पंडितों के बताये अनुसार भैंसे की बली के बदले देवी को लड्डू भोग लगाया जाता है. मंदिर के कोषाध्यक्ष प्रदीप टिबरबाल बताते हैं कि यहां अष्टमी पूजा से भव्य मेला लगता हैं.और विजया दशमी के दिन प्रर्तिमा विषर्जन के बाद रात्री में संकृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है.पूजा को लेकर बाराहाट का पुरा बाजार इन दिनों गहमा गहमी से भरा हुआ है.दुकान दार से लेकर खरीददार तक सब इस महापर्व में व्यस्त नजर आ रहे हैं.वहीं पूजा के मौके पर मंदिर परिसर और इसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था एवं शांति के लिये सहायक उपाध्यक्ष जय प्रकाश चौधरी,कोषाध्यक्ष राकेश कुमार ,सहायक सचिव राजीव लोचन मिश्रा के साथ प्रदीप खेतान,रामानंद चौधरी,राजीव लोचन मिश्रा, हीरा लाल मंडल, हनुमान अग्रवाल, संजय चौधरी, गोपाल चौधरी, रघुनाथ चौधरी, सुबोध साह सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

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