आर्मी जवान की मौत गांव में छाया मातम

बांका / शंभुगंज : शंभुगंज प्रखंड क्षेत्र के रमचुआ गांव निवासी संटू कुमार की अचानक मौत होने से पूरे गांव में शोक का लहर दौर गयी. प्राप्त जानकारी के अनुसार रमचुआ निवासी सुबोध सिंह के पुत्र संटू कुमार की 3 साल पूर्व में आर्मी में नौकरी हुई थी. वह सियाचिन में कार्यरत था. जानकारी के […]
बांका / शंभुगंज : शंभुगंज प्रखंड क्षेत्र के रमचुआ गांव निवासी संटू कुमार की अचानक मौत होने से पूरे गांव में शोक का लहर दौर गयी. प्राप्त जानकारी के अनुसार रमचुआ निवासी सुबोध सिंह के पुत्र संटू कुमार की 3 साल पूर्व में आर्मी में नौकरी हुई थी.
वह सियाचिन में कार्यरत था. जानकारी के अनुसार, पिछले कई दिनों से वो ड्यूटी पर ही बीमार चल रहा था. परिजनों को मौत होने की सूचना बुधवार को मिली. मौत होने की खबर सुनते ही पूरे गांव मातम में छा गया है.
ग्रामीणों के अनुसार, शव सियाचिन से हेलीकॉप्टर द्वारा आने की सूचना है. भाई में सबसे बड़ा था संटू बांका. रमचुआ निवासी सुबोध सिंह के तीन पुत्र थे. इनमें सबसे बड़ा संटू ही था, जो बचपन से साहसी व पढ़ने में काफी तेज था. संटू की नौकरी लगने के बाद एक और भाई ने अपने कड़ी मेहनत कर विगत माह पहले अर्मी में ही नौकरी हासिल किया. जो अभी ट्रेनिंग कर रहे हैं.
वहीं तीसरे भाई अभी पढ़ाई करने में लगे हुए. इनकी मौत की खबर सुनते ही परिजन सहित पूरे सात पट्टी में मातम का माहौल है. परिजनों को रो-रो के बुरा हाल है. 2014 में संटू ने किया था आदर्श विवाहबांका. आर्मी में नौकरी लगने के बाद संटू ने बगल के ही गुलनी गांव निवासी विभाष सिंह के पुत्री रूपम कुमारी के साथ आदर्श शादी किया.
शादी के कुछ माह तक संटू अपने घर पर ही पत्नी व परिवार के साथ रहते थे. इसके बाद वो अपने नौकरी पर चल गये थे जो काफी दिनों से अपना घर नहीं आया था. दुर्गा पूजा व दीपावली पर्व को लेकर संटू अपना घर आने वाला था. अपने पुत्र को नहीं देख पाये संटू बांका. शादी के बाद संटू ने अपने पत्नी रुपम को रमचुआ में छोड़ कर नौकरी पर गया था.
पिछले माह रुपम ने पुत्र का जन्म दिया जिससे संटू के घर में काफी खुशी का माहौल था. साथ ही ड्यूटी पर तैनात संटू ने अपने पुत्र का जन्म होने की बात पर सुन कर काफी प्रसंग होते हुए जल्द ही घर आने की बात परिजनों से कही थी. जिन्होंने घर आकर पुत्र का जन्म दिन धूमधाम से मनाने की बात कही थी. किसकी लगी नजर बांका.
संटू के गांव वाले सहित आस-पास के ग्रामीण कर रहे थे कि आखिर किसकी नजर लगी है जो हर साल दुर्गा पूजा के समय में ही इस गांव में मातम का माहौल छा जाता है. दुर्गा पूजा व दीपावली पर्व मनाने के लिए लोग दूर-दराज से अपने गांव पहुंचते है. साथ ही रमचुआ गांव से सटे शक्ति पीठ तेलडीहा महरानी के दर्शन के लिए काफी दूर-दूर से लोग इस पर्व में शामिल होने के यहां पहुंचते हैं. लेकिन पिछले कई सालों से इस गांव में दुर्गा पूजा के समय ही कुछ ना कुछ बिडम्बना हो जाती है. जिससे पूरे सात पट्टी में शोक का माहौल हो जाता है.
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