संयम व विश्वास उत्कृष्ट जीवन के स्तंभ : डॉ शंभू

Published by : SUDHIR KUMAR SINGH Updated At : 17 Jan 2026 4:45 PM

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विवेकानंद वीआइपी स्कूल में उत्प्रेषित बच्चों के लिए आयोजित हुआ मंगलाशीष कार्यक्रम

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विवेकानंद वीआइपी स्कूल में उत्प्रेषित बच्चों के लिए आयोजित हुआ मंगलाशीष कार्यक्रम औरंगाबाद शहर. शहर के विवेकानंद वीआइपी स्कूल में शनिवार को कक्षा 10वीं के उत्प्रेषित छात्र-छात्राओं के लिए मंगलाशीष कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक डॉ शंभू शरण सिंह, प्राचार्य एनके सिंह, उप प्राचार्या सूची कुमारी ने स्वामी विवेकानंद के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर नौवीं के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी. छात्रों ने रोचक नृत्य, नाटक, भाषण द्वारा अपने विद्यालय में गुजारे समय को याद किया. निदेशक ने कहा कि मानव जीवन विविध चुनौतियों से भरा होता है. संघर्ष ही हमारे जीवन को परिष्कृत और परिमार्जित कर और बेहतर बनाते हैं. हमें संघर्षों को स्वीकार कर बड़ी तन्मयता से धैर्यपूर्वक सामना करना चाहिए. संयम और दृढ़ विश्वास ही आपको सफलता के शिखर तक ले जाने में स्तंभ का काम करेंगे. विद्यालय के स्वस्थ और अनुशासित माहौल में आपने जो भी सीखा है वह भविष्य निर्माण में एक कड़ी के रूप में कार्य करेगा. आपको शिक्षकों को कठोरता और मृदुता दोनों का सामना करना पड़ा होगा, जो मनुष्य निर्माण की जड़ में खाद का काम करता है. आने वाले समय में आप सब विविध क्षेत्रों और सेवाओं में जायेंगे, जहां आपको यह अनुशासन आपको उत्कृष्टता प्रदान करेगा. प्राचार्य ने कहा कि विद्यालय में सीखे कौशल आपके व्यक्तित्व को निखारने में एक उपयोगी टूल्स साबित होंगे. भावुक बच्चों को ढांढस देते हुए उन्होंने कहा कि यह जीवन में चलने वाली एक अहम प्रक्रिया है जिसे हमें सहर्ष स्वीकार करना होगा. पूरी तन्मयता से पढ़ाई कर बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करें. आप जहां भी जाएं अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करते रहें, राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्यशील रहें. आपने जो कुछ भी सीखा है उसका सदुपयोग राष्ट्रनिर्माण में करे. इस दौरान कई बच्चों ने अपनी भावना व्यक्त करते भावुक हुए. उप प्राचार्य सूची कुमारी ने कहा कि विवेकानंद का मानना था कि हर किसी में दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है. “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए ” यह उद्धरण छात्रों को अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए प्रेरित करता है. हमें अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन द्वारा परिवार, समाज और राष्ट्र को उन्नत बनाने हेतु प्रयत्नशील रहना चाहिए.

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