औरंगाबाद: महाविद्यालय पुनर्गठन प्रस्ताव का विरोध, कर्मचारी महासंघ ने दी आंदोलन की चेतावनी; बोले-विश्वविद्यालय केवल परीक्षा केंद्र नहीं

Author Sujit kumar|Edited by Ragini Sharma
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जानकारी देते संतोष कुमार | Prabhat Khabar Network

जानकारी देते संतोष कुमार

बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ ने स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन और विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन का कड़ा विरोध जताया है. महासंघ ने इसे उच्च शिक्षा व्यवस्था, स्वायत्तता और विद्यार्थियों के हितों के लिए नुकसानदायक बताया है. प्रस्ताव वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है.

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Bihar College Restructuring Protest : बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ, मगध प्रक्षेत्र ने राज्य सरकार द्वारा स्नातक महाविद्यालयों के प्रस्तावित पुनर्गठन और विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव का कड़ा विरोध जताया है. महासंघ ने इसे उच्च शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और विद्यार्थियों के हितों के लिए नुकसानदायक बताया है.

इस संबंध में जारी प्रेस विज्ञप्ति में महासंघ ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार इस प्रस्ताव को वापस नहीं लेती है, तो इसके खिलाफ लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा.

विश्वविद्यालयों की भूमिका होगी सीमित

महासंघ के प्रक्षेत्रीय मंत्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं हैं, बल्कि शिक्षण, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण, परीक्षा संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण और शिक्षक विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि स्नातक महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों के नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया जाता है, तो विश्वविद्यालयों की भूमिका सीमित हो जाएगी और संबद्धता व्यवस्था कमजोर पड़ जाएगी.

Education News : अकादमिक व्यवस्था पर पड़ेगा असर

महासंघ का कहना है कि इस प्रस्ताव से विश्वविद्यालयों की अकादमिक परिषद, अध्ययन बोर्ड, सीनेट और परीक्षा समिति जैसे वैधानिक निकायों की प्रभावशीलता प्रभावित होगी.

इसके साथ ही विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के बीच वर्षों से स्थापित शैक्षणिक समन्वय भी बाधित हो सकता है. पाठ्यक्रम विकास, परीक्षा प्रणाली, शोध गतिविधियों और मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है.

एनईपी-2020 की भावना के खिलाफ बताया कदम

प्रेस बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विश्वविद्यालय आधारित उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने पर जोर देती है. ऐसे में महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों से अलग कर विभागीय नियंत्रण में लाने का प्रस्ताव इस नीति की मूल भावना के विपरीत है.

प्रस्ताव वापस लेने की मांग

महासंघ ने राज्य सरकार से इस प्रस्तावित पुनर्गठन और संशोधन को तुरंत वापस लेने की मांग की है. साथ ही विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, छात्र संगठनों और उच्च शिक्षा से जुड़े सभी पक्षों से इस प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की गई है.

इस मौके पर महासंघ के संरक्षक विनेश कुमार सिंह, अध्यक्ष राजीव कुमार भास्कर, सह-सचिव ब्रजेश कुमार सिंह और कमलेश प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा की स्वायत्तता और गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.


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