मिशन सुदर्शन चक्र को मिलेगी ताकत, अगले 12 महीनों में प्रोजेक्ट कुशा के 3 इंटरसेप्टर मिसाइलों का होगा परीक्षण

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'कुशा' लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस मिसाइल के सफल परीक्षण की फोटो (Photo : DRDO)

'कुशा' लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस मिसाइल के सफल परीक्षण की फोटो (Photo : DRDO)

भारत अपने एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करने की तैयारी में है. DRDO अगले 12 महीनों में प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन लंबी दूरी की इंटतसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण करेगा. यह सिस्टम भारत की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता को नई मजबूती देगा.

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Project Kusha : 'मिशन सुदर्शन चक्र' योजना के तहत भारत अपने एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड को तेजी से मजबूत कर रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अगले 12 महीनों में प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन इंटरसेप्टर मिसाइलों का परीक्षण करेगा. इसका पहला सफल परीक्षण 23 जुलाई को किया जा चुका है.

गुरुवार को ओडिशा तट के पास 120 किलोमीटर रेंज वाले Kusha M-1 इंटरसेप्टर का पहला सफल परीक्षण किया गया. इसके बाद 150 किलोमीटर रेंज वाले M-2 और 400 किलोमीटर रेंज वाले M-3 इंटरसेप्टर का परीक्षण किया जाएगा.

भारतीय एयर डिफेंस कैपेबिलिटी बढ़ेगी

प्रोजेक्ट कुशा के तहत विकसित M-1, M-2 और M-3 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं. इनका उद्देश्य दुश्मन की मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और ड्रोन जैसे हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट करना है. यह सिस्टम भारत की 80 किलोमीटर रेंज वाली मीडियम रेंज एयर डिफेंस मिसाइल और रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बीच की क्षमता की कमी को पूरा करेगा. भविष्य में यही इंटरसेप्टर भारत की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली की अहम कड़ी बनेंगे.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी परियोजना की रफ्तार

इस प्रोजेक्ट को मई 2022 में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी मिल गई थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस परियोजना को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से बड़ी संख्या में मिसाइलों और ड्रोन से हमले की कोशिश की गई थी, जिन्हें भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया था.

इसके बाद लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई. इसी अनुभव और हाल के ईरान-अमेरिका संघर्ष में मिसाइल व ड्रोन युद्ध के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इस परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है.

S-400 के साथ बनेगी मजबूत सुरक्षा कवच

प्रोजेक्ट कुशा सिर्फ इंटरसेप्टर मिसाइलों तक सीमित नहीं है. इसके तहत लंबी दूरी के आधुनिक रडार भी विकसित किए जा रहे हैं, जो सीमा पार से दागी गई मिसाइलों का पहले ही पता लगा सकेंगे. इसके साथ ही भारत इस साल नवंबर तक रूस से पांचवां S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मिलने की उम्मीद कर रहा है. इसके अलावा भारत ने पांच और S-400 सिस्टम हासिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रजेक्ट कुशा और S-400 मिलकर भारत के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाएंगे.


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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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