भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का ओबरा में आक्रोश मार्च

यूजीसी कानून के समर्थन में किया प्रदर्शन
यूजीसी कानून के समर्थन में किया प्रदर्शन प्रतिनिधि, ओबरा. ओबरा प्रखंड परिसर में शुक्रवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन (भाकपा माले लिबरेशन) के बैनर तले गरीबों के वास-आवास की गारंटी, प्रखंड व अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ तथा यूजीसी कानून के समर्थन में आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन किया गया. आक्रोश मार्च ओबरा उच्च विद्यालय मैदान से शुरू होकर मुख्य बाजार होते प्रखंड परिसर पहुंचा. यहां कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. बाद में प्रदर्शन सभा में तब्दील हो गयी. सभा की अध्यक्षता प्रखंड सचिव कॉ दिनेश राम ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में जिला सचिव मुनारिक राम उपस्थित रहे. इसमें मुनारिक राम ने आरोप लगाया कि अंचल एवं प्रखंड कार्यालयों में भ्रष्टाचार की लगातार शिकायतें मिल रही हैं. कार्यालयों में बिचौलियों का बोलबाला है और संबंधित पदाधिकारी उन्हें संरक्षण दे रहे हैं. उन्होंने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर सभी गरीबों को पांच डिसमिल जमीन देने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बसे गरीब परिवारों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है. गैनी पंचायत के कोठियां गांव में वर्षों से बसे गरीबों को उजाड़ने के लिए नोटिस दिये जाने पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जतायी. उन्होंने कहा कि हजारों एकड़ गैरमजरुआ जमीन प्रभावशाली लोगों के कब्जे में है, लेकिन प्रशासन उस पर कार्रवाई नहीं कर रहा है. सभा में नवनेर सोन दियारा की खेती बचाने की मांग भी प्रमुखता से उठायी गयी. वक्ताओं ने कहा कि करीब 80 वर्षों से खेती कर रहे गरीब मजदूरों को बालू माफियाओं की ओर से धमकियां दी जा रही हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. यूजीसी कानून के समर्थन में उठायी आवाज सभा के दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों के साथ भेदभाव के मुद्दे को उठाते हुए वक्ताओं ने यूजीसी कानून को छात्र हित में आवश्यक बताया. भाकपा माले ने इसे समान शिक्षा और छात्र अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. प्रदर्शन को भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कारण पासवान, जिला सचिव पिंटू रजा, जिला उपाध्यक्ष करण कुमार व राजा पासवान ने भी संबोधित कर समर्थन दिया. इस प्रदर्शन के दौरान गरीबों को बासगीत पर्चा निर्गत करने, कोठियां गांव में उजाड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने, नवनेर सोन दियारा में खेती बचाने, मनरेगा कानून को पुनः बहाल करने, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और समान शिक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की गयी. इस प्रदर्शन में सैकड़ों महिला-पुरुष कार्यकर्ता शामिल हुए और मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी.
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