दाउदनगर की आजीविका दीदियों का नगर पर्षद के खिलाफ मोर्चा; मानदेय नहीं, काम बंद, अब आंदोलन की राह

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चरणबद्ध आंदोलन की बनी रणनीति

Aurangabad News : कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने और काम बंद किए जाने से आजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में भारी नाराजगी है. महिलाओं ने नगर पर्षद के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है.

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Aurangabad News (ओम प्रकाश) : जिले के दाउदनगर नगर पर्षद में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शहरी आजीविका मिशन के तहत गठित आजीविका स्वयं सहायता समूह की सीआरपीएस के पद पर कार्यरत आजीविका दीदियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने और काम बंद कर दिए जाने से परेशान महिलाओं ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है.

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इस संबंध में नगर पर्षद के कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन भी सौंपा गया है, वहीं अब ओबरा विधायक डॉ. प्रकाश चंद्र को मांग पत्र देने की तैयारी चल रही है. आजीविका दीदियों का कहना है कि उन्होंने नगर पर्षद के विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है. जून 2025 से अप्रैल 2026 तक उन्होंने नगर पर्षद दाउदनगर के कई कार्यक्रमों और योजनाओं में सहयोग किया. उनके कार्यों की सराहना भी हुई, लेकिन अब स्थिति यह है कि न तो उन्हें उनका बकाया मानदेय दिया जा रहा है और न ही आगे कोई कार्य सौंपा जा रहा है. इससे उनके समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है.

बैठक में चरणबद्ध आंदोलन की बनी रणनीति

पुराना शहर में आयोजित एक बैठक में रीता देवी, अनिता कुमारी, संजू देवी, मीना कुमारी, सरस्वती कुमारी, उषा कुमारी और निर्मला देवी समेत अन्य आजीविका दीदियों ने अपनी समस्याओं पर चर्चा की. बैठक में सर्वसम्मति से चरणबद्ध आंदोलन चलाने का निर्णय लिया गया. महिलाओं ने कहा कि पहले सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत विभाग से संबंधित जानकारी प्राप्त की जाएगी. इसके बाद लोक शिकायत निवारण कार्यालय में वाद दायर किया जाएगा.

मांग पूरी नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

आजीविका दीदियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे ओबरा विधायक एवं औरंगाबाद डीएम से मिलकर मांग पत्र सौंपेंगी. इसके बावजूद समाधान नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन को और तेज किया जाएगा. महिलाओं का कहना है कि वे लंबे समय से पूरी निष्ठा के साथ काम कर रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है. अब वे अपने अधिकार और मानदेय के लिए संगठित होकर संघर्ष करने को मजबूर हैं.

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