Aurangabad News : एक कमरे में सिमटा 250 बच्चों का भविष्य, जीर्ण-शीर्ण भवन बना खतरा
Published by : JITENDRA KUMAR Updated At : 19 May 2026 10:33 PM
स्कूल के बदहाल भवन को लेकर आक्रोश जताते ग्रामीण.
Aurangabad News : प्रखंड के वाजित नीमा मध्य विद्यालय की बदहाल व्यवस्था ने शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोल दी है.यहाँ की स्थिति इतनी खराब है कि पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 250 छात्र-छात्राओं को मात्र एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. स्कूल की इस दुर्दशा और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितता को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विभाग के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
रफीगंज (सत्येंद्र पाठक). प्रखंड के वाजित नीमा मध्य विद्यालय की बदहाल व्यवस्था ने शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोल दी है.यहाँ की स्थिति इतनी खराब है कि पहली से आठवीं कक्षा तक के करीब 250 छात्र-छात्राओं को मात्र एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. स्कूल की इस दुर्दशा और शिक्षा व्यवस्था में अनियमितता को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने विभाग के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया. ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में कुल दो कमरे हैं, जिनमें से एक का उपयोग ऑफिस के रूप में होता है और दूसरे में सभी 250 बच्चों को ठूस-ठूस कर बैठाया जाता है. स्कूल की चहारदीवारी टूटी हुई है, चापाकल महीनों से खराब है और शौचालय उपयोग के लायक नहीं बचा है. भीषण गर्मी और टूटे बेंचों पर बैठकर बच्चे जैसे-तैसे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. इसके अलावा, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चों को अंडा और फल देने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है.
शिक्षकों की कमी और अव्यवस्था का बोलबाला
विद्यालय में प्रधानाध्यापिका सहित चार शिक्षक तैनात हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पढ़ाई का बोझ केवल तीन शिक्षकों पर है. आरोप है कि प्रधानाध्यापिका अक्सर स्कूल से बाहर रहती हैं. विधायक प्रतिनिधि उमेश पासवान और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि आठवीं तक के इस स्कूल में व्यवस्थाएं प्राथमिक स्तर की भी नहीं हैं. विकास मद की राशि कहाँ खर्च हो रही है, इसका कोई पता नहीं है.
प्रशासन की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों ने बताया कि करीब एक माह पूर्व 200 लोगों के हस्ताक्षर वाला आवेदन शिक्षा विभाग को दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस संबंध में प्रधानाध्यापिका संगीता कुमारी का कहना है कि संसाधनों की कमी के बारे में विभाग को सूचित किया गया है. वहीं, शिक्षा पदाधिकारी ने मामले की पुनः जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब देखना यह है कि इन मासूमों को एक सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक माहौल कब तक मिल पाता है.
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