Aurangabad News : 10 माह में 395 थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड बैंक ने उपलब्ध कराया खून

Aurangabad News:सदर अस्पताल का ब्लड बैंक प्रतिमाह औसतन 40 से 50 यूनिट रक्त करा रहा लोगों को उपलब्ध
औरंगाबाद ग्रामीण. सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनरेखा बनकर उभरा है. बिहार में मरीजों को नियमित और नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराने में ब्लड बैंक अग्रणी भूमिका निभा रहा है. अप्रैल 2025 से 15 जनवरी 2026 तक ब्लड बैंक के माध्यम से 395 थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को रक्त उपलब्ध कराया गया है. जिससे सैकड़ों मासूम जिंदगियों को नया जीवन मिला है. ब्लड बैंक प्रबंधन के अनुसार, थैलीसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. ऐसे में समय पर रक्त नहीं मिलने से बच्चों की जान पर संकट खड़ा हो जाता है. सदर अस्पताल का ब्लड बैंक प्रतिमाह औसतन 40 से 50 यूनिट रक्त थैलीसीमिया से ग्रसित बच्चों को नि:शुल्क उपलब्ध करा रहा है, जो जिले के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लिए भी राहत की बात है. ब्लड बैंक के सीनियर लैब टेक्नीशियन आशुतोष मिश्रा ने बताया कि थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज में रक्तदान की भूमिका सबसे अहम है. उन्होंने कहा कि इन बच्चों का जीवन पूरी तरह रक्तदान पर निर्भर है. यदि समाज आगे आकर नियमित रूप से रक्तदान करे, तो किसी भी बच्चे की जान रक्त की कमी से नहीं जायेगी. उन्होंने आम लोगों से अपील की कि स्वस्थ व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान करें, ताकि इन नौनिहालों को समय पर जीवनरक्षक रक्त मिल सके. ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर रक्तदान शिविरों का भी आयोजन किया जाता है. इसके अलावा स्वयंसेवी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर रक्तदान में हिस्सा ले रहे हैं. ब्लड बैंक कर्मियों का कहना है कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे दाता के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता, बल्कि यह समाज के प्रति एक मानवीय कर्तव्य है. थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों ने भी सदर अस्पताल के ब्लड बैंक और वहां कार्यरत कर्मचारियों के प्रति आभार जताया है. उनका कहना है कि यदि समय पर रक्त उपलब्ध न होता, तो बच्चों का इलाज संभव नहीं हो पाता. ब्लड बैंक की यह सेवा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. ब्लड बैंक प्रबंधन ने यह भी बताया कि भविष्य में थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या को देखते हुए रक्त की मांग और बढ़ सकती है. ऐसे में समाज के हर वर्ग को आगे आकर रक्तदान के प्रति जागरूक होना होगा. ब्लड बैंक टेक्नीशियन आशुतोष मिश्रा ने फिर दोहराया कि एक यूनिट रक्त किसी मासूम की पूरी जिंदगी बचा सकता है. इसलिए सभी सक्षम लोग नियमित रूप से रक्तदान करें .
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