दूसरे जिलों की तर्ज पर औरंगाबाद जिले का नाम किया जाये देव

Updated at : 21 May 2025 5:54 PM (IST)
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दूसरे जिलों की तर्ज पर औरंगाबाद जिले का नाम किया जाये देव

जनेश्वर विकास केंद्र ने बुधवार को अधिवक्ता संघ भवन में प्रेस वार्ता आयोजित किया

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औरंगाबाद शहर. जनेश्वर विकास केंद्र ने बुधवार को अधिवक्ता संघ भवन में प्रेस वार्ता आयोजित किया. इसमें सचिव सिद्धेश्वर विद्यार्थी ने बताया कि औरंगाबाद जिले का नाम देव धाम करवाने के लिए प्रयास तेज किया जायेगा. उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले गया का नाम अब गयाजी हो गया है. यह पूरे मगध के लिए हर्ष की बात है. वहां के जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार जताया. बिहार के लगभग सभी जिले वहां के इतिहासों के नाम से ही जुड़ा हुआ है. यदि रोहतास जिले की बात हो तो यह भी रोहतास किले की इतिहास से जुड़ा हुआ नाम है. जबकि, रोहतास का हेड क्वार्टर सासाराम है. पर्वत शृंखला के नाम पर जिले का नाम कैमूर रखा गया है. जबकि जिला मुख्यालय भभुआ है. राजा भोज के नाम पर जिले का नाम भोजपुर जिला है जो इतिहास से जुड़ा है. जबकि हेड क्वार्टर आरा है. इसी तरह वैशाली और नालंदा का नाम भी ऐतिहासिक जगह के नाम पर रखा गया है जबकि इसका मुख्यालय क्रमशः हाजीपुर व बिहारशरीफ है. एक जीता जागता उदाहरण इसी जिला में विद्यमान है जहां ऐतिहासिक गढ़ होने के कारण प्रखंड का नाम कुटुंबा है. जबकि मुख्यालय अंबा में है. इसी तरह औरंगाबाद के ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर देव सूर्य मंदिर के इतिहास से औरंगाबाद का नाम रखा जाये और औरंगाबाद का भी नाम देव धाम किया जाये. इसके लिए हम लोग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग करते हैं. समाजसेवी आदित्य श्रीवास्तव ने गया को गयाजी नामकरण पर पूरे मगध वासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है. उन्होंने यह बताया कि यह पूरे मगध के लिए गौरव का पल है. यहां प्रभु श्री राम ने अपने पिता का पिंडदान दिया. अब गया अपने पुराना नाम से नहीं गयाजी के नाम से जाना जायेगा. इस तरह हमसभी मांग करते हैं कि औरंगाबाद को भी इतिहास के तथ्य पर नाम जोड़ा जाये जो कि देव सूर्य मंदिर के इतिहास के साथ नाम जोड़कर देवधाम या देव रखा जाये, ताकि प्राचीन सूर्य मंदिर के इतिहास का प्रचार प्रसार हो सके. देव सूर्य मंदिर पूरे एशिया का सबसे प्राचीन मंदिर है. सभी जिले अपने इतिहासों के साथ जुड़े हुए नाम से ही है. औरंगजेब के नाम पर यह जिले का नाम सही नहीं है. औरंगजेब के इतिहास से औरंगाबाद का इतिहास नहीं है. इसका इतिहास प्राचीन सूर्य मंदिर से जुड़ा हुआ है. इसलिए देव नाम से औरंगाबाद को जोड़ा जाये. यह मांग हम लोग मुख्यमंत्री से करते हैं और जनप्रतिनिधियों से भी इस दिशा में पहल करने की मांग करते हैं.

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