परिजनों को खोजते औरंगाबाद पहुंची कोनाड़ की राजमाता

Published at :27 Sep 2016 4:53 AM (IST)
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परिजनों को खोजते औरंगाबाद पहुंची कोनाड़ की राजमाता

ओम प्रकाश प्रीत औरंगाबाद : उदयपुर, राजस्थान का एक प्रमुख शहर है, जिसे सिसौदिया राजवंश के वंशज महाराणा उदय सिंह ने स्थापित किया था. उदयपुर शहर सिसौदिया राजवंश द्वारा शासित मेवाड़ की राजधानी रहा है. इतिहास के इन तथ्यों को हम सभी सुनते और पढ़ते आये थे, लेकिन सोमवार को जब इसी राजवंश की वर्तमान […]

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ओम प्रकाश प्रीत
औरंगाबाद : उदयपुर, राजस्थान का एक प्रमुख शहर है, जिसे सिसौदिया राजवंश के वंशज महाराणा उदय सिंह ने स्थापित किया था. उदयपुर शहर सिसौदिया राजवंश द्वारा शासित मेवाड़ की राजधानी रहा है.
इतिहास के इन तथ्यों को हम सभी सुनते और पढ़ते आये थे, लेकिन सोमवार को जब इसी राजवंश की वर्तमान राजमाता इंदिरा कुमारी अपने परिजनों को तलाशते औरंगाबाद पहुंचीं, तो लोगों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. दरअसल, उदयपुर मेवाड़ राजस्थान प्रांत के कोनाड़ की राजमाता इंदिरा कुमारी, गया के विष्णुपद मंदिर के निकट फल्गु नदी में अपने पूर्वजों का पिंडदान करने आयीं थीं. गया में पिंडदान करने के बाद बाद मदनपुर, घटराइन गांव के रहने वाले अभिषेक सिंह की मदद से राजमाता अपने परिजनों का गांव ढूंढते औरंगाबाद पहुंचीं. अभिषेक सिंह देव और उमगा पर शोध कर एक किताब लिख रहे है.
इसी शोध के दौरान अभिषेक की मुलाकात कोनाड़ की राजमाता इंदिरा कुमारी से हुई थी. जब अपने परिजनों को खोजते हुए राजमाता देव पहुंचीं, तो उन्होंने बताया कि वे कोनाड़ के महाराणा लाख सिंह के दूसरे बेटे महाराणा अजा सिंह के परिवार से ताल्लुकात रखती हैं और राजा भान सिंह के परिवार से आती हैं. वे पुराने देव, उमगा स्टेट में रहने वाले सिसौदिया राजपूत परिवार को 1962 से ढूंढ रही हैं.
राजमाता इंदिरा ने बताया कि वे महारावत प्रताप सिंह की पत्नी हैं. उन्हें औरंगाबाद में सिसौदिया राजपूत के इतिहास का तब पता चला ,जब 1934 के आसपास महारावत केसर सिंह से देव राज परिवार का पत्राचार हुआ था. लेकिन, 1962 में सरकारी छापा पड़ने पर सभी पत्र व राजघराने से जुड़े प्रमाण अधिकारी लेते गये थे. पर, इस दौरान एक पत्र भूलवश राजघराने में छूट गया था, जिसके आधार पर वे लगातार अपने परिजनों की खोज में भटक रही हैं.
उन्हेंने कहा कि उस पत्र में देव और उमगा का जिक्र देवमुंगा स्टेट है. इसी कारण देव और उमगा स्थल की शिनाख्त ठीक से नहीं हो पा रही थी. वे पहले भी कई बार अपने परिजनों को खोजते हुए वे औरंगाबाद आ चुकी हैं. लेकिन पत्र में देवमुंगा नाम का उल्लेख होने के कारण वे अपने परिजनों से अब तक नहीं मिल सकीं थीं. लेकिन, जब मदनपुर घटराइन के अनुग्रह नारायण सिंह के बेटे लेखक अभिषेक सिंह से मुलाकात हुई तो उन्होंने धर्मवीर फिल्म एण्ड टीवी प्रोडक्शन द्वारा बनायी गयी देव उमगा डॉक्यूमेंटरी फिल्म दिखायी.
राजमाता इंदिरा कुमारी ने औरंगाबाद के सिसौदिया राजपूतों से मिल कर खुशी जाहिर की और कुछ लोगों के साथ उमगा और देव मंदिर का भ्रमण भी किया. इस दौरान उन्होंने कोनाड़ के वंशजों से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को जान कर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज भी औरंगाबाद देव में सिसौदिया राजवंश का किला अपनी इतिहास को समेटे हुए है, लेकिन अफसोस की इसके संरक्षण में सरकारी स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया जा रहा.
उन्होंने सिसौदिया राजवंश से जुड़े देव और उमगा के एेतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की बात कही और कहा कि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये, ताकि मेवाड़ राजस्थान से जुड़े इस राज्य को लोग जान सकें. राजमाता इंदिरा कुमारी के देव किला भ्रमण के दौरान धर्मवीर भारती फिल्म एंड टीवी प्रोडक्शन के निदेशक धर्मवीर भारती ने कहा कि देव और उमगा के संरक्षण के लिये वे काफी दिनों से प्रयास में लगे हैं. धर्मवीर भारती ने राजमाता इंदिरा कुमारी को अपने प्रोडक्शन हाउस का प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया. इस दौरान अनिल सिंह, विश्वनाथ सिंह, ऋषि सिंह, संतोष सिंह, विनय सिंह आिद थे.
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